लोक अदालत में टूटा रिकॉर्ड! गौतमबुद्धनगर में 10 लाख से ज्यादा मामलों का निस्तारण, इतने करोड़ रुपये के समझौते

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गौतमबुद्धनगर: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर गौतमबुद्धनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जनपद न्यायालय मुख्यालय के साथ तहसील स्तर पर आयोजित लोक अदालत की अध्यक्षता एवं दिशा-निर्देशन जनपद न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान कुल 10,08,279 वादों का निस्तारण किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन जनपद न्यायालय के सभागार में जनपद न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में जनपद के न्यायिक अधिकारियों के साथ जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव भी मौजूद रहे।

न्यायालयों में 76,954 वादों का निस्तारण

प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय विरेक अग्रवाल के अनुसार, जनपद न्यायालय में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों ने कुल 76,954 वादों का निस्तारण किया। इन मामलों में समझौते के रूप में कुल 16,06,44,918 रुपये की धनराशि रही।

जिलाधिकारी के अधीनस्थ विभागों द्वारा 4,76,181 मामलों का निस्तारण किया गया। बैंक से संबंधित 245 मामलों में 3,61,57,241 रुपये की धनराशि वसूल की गई। फाइनेंस कंपनी के 6 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 39,670 रुपये की धनराशि वसूल की गई।

यातायात विभाग ने 4 लाख से अधिक मामले निपटाए

एनपीसीएल से जुड़े 35 मामलों का निस्तारण हुआ और 4,85,000 रुपये की समझौता धनराशि रही। यूपीपीसीएल के 5,931 मामलों का निस्तारण किया गया। श्रम न्यायालय में 1,102 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 4,19,23,189 रुपये की धनराशि रही।

पुलिस विभाग ने 32,089 मामलों का निस्तारण किया। बीएसएनएल से जुड़े 51 मामलों में 1,52,206 रुपये की धनराशि वसूल की गई। वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम के तहत प्री-लिटिगेशन स्तर पर 221 मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं यातायात विभाग ने 4,00,263 मामलों का निस्तारण किया।

प्री-लिटिगेशन के 9,31,325 मामलों का निस्तारण

राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत प्री-लिटिगेशन स्तर पर कुल 9,31,325 मामलों का निस्तारण किया गया। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने भी 5,160 मामलों को निस्तारित किया।

इसके अलावा चिकित्सा विभाग द्वारा 1,00,045 मामलों का निस्तारण किया गया। पुलिस विभाग के 32,089 मामलों का भी निस्तारण लोक अदालत के माध्यम से हुआ।

पोक्सो कोर्ट से लेकर परिवार न्यायालय तक मामलों का निस्तारण

न्यायालयवार आंकड़ों के अनुसार, जिला जज अतुल श्रीवास्तव ने 4 वाद निस्तारित किए। वाणिज्य न्यायालय प्रथम के पीठासीन अधिकारी रविन्द्र नाथ दुबे ने 13 वादों का निस्तारण करते हुए 1,07,01,459 रुपये की समझौता धनराशि तय की। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय चन्द्रप्रकाश तिवारी ने 62 वादों का निस्तारण किया।

वाणिज्य न्यायालय द्वितीय के पीठासीन अधिकारी जगदीश प्रसाद ने 20 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 1,04,24,099 रुपये की समझौता धनराशि रही। भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण के अधिकारी सुनील कुमार श्रीवास्तव ने 55 वादों का निस्तारण किया।

मोटर दुर्घटना और पोक्सो मामलों में भी निस्तारण

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी वत्सल श्रीवास्तव ने 43 वादों का निस्तारण किया। इन मामलों में 4,40,89,000 रुपये की समझौता धनराशि रही। अपर जिला जज प्रथम सुनील कुमार ने 3 वादों का निस्तारण करते हुए 500 रुपये जुर्माना वसूला।

अपर जिला जज द्वितीय सोमप्रभा मिश्रा ने 7 वादों का निस्तारण किया। पोक्सो कोर्ट प्रथम के अपर जिला जज अभिषेक पाण्डेय ने 8 वादों का निस्तारण करते हुए 800 रुपये जुर्माना वसूला। पोक्सो कोर्ट द्वितीय के अपर जिला जज कुमार गौरव ने 580 वादों का निस्तारण किया और 1,15,10,250 रुपये जुर्माने की धनराशि रही।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 3,360 वाद निस्तारित

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरिकेष पाण्डेय की अदालत में 3,360 वादों का निस्तारण हुआ और 10,42,973 रुपये जुर्माना वसूला गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मयंक त्रिपाठी ने 2,040 वादों का निस्तारण करते हुए 1,07,200 रुपये जुर्माना वसूला।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय विरेक अग्रवाल ने 921 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 62,800 रुपये जुर्माने की धनराशि रही। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रवि कुमार सागर ने 779 वादों का निस्तारण किया।

विभिन्न अदालतों में भी बड़ी संख्या में मामले सुलझे

सिविल जज सीडि प्रथम सुमित कुमार ने 892 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 48,180 रुपये की समझौता धनराशि रही। सिविल जज जूडि चतुर्थ अंकिता सिंह ने 43 वादों का निस्तारण किया। वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से 63,103 मामलों का निस्तारण हुआ और 10,06,400 रुपये जुर्माना वसूला गया।

अपर सिविल जज जूडि प्रथम श्रयांश निरंजन ने 686 वादों का निस्तारण किया और 5,000 रुपये जुर्माना वसूला। जेवर के सिविल जज कनिष्ठ संवर्ग सूर्य चौहान ने 18 वादों का निस्तारण करते हुए 12,500 रुपये जुर्माना वसूला। अपर सिविल जज जूडि प्रथम अभिषेक कुमार ने 2,174 वादों का निस्तारण किया और 16,600 रुपये जुर्माना वसूला।

सिविल जज जूडि कुंवर जूही आनंद ने 511 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 24,200 रुपये जुर्माने की धनराशि रही। सिविल जज जूडि एवं एफटीसी प्रभात कुमार ने 556 वादों का निस्तारण किया और 3,000 रुपये जुर्माना वसूला। सिविल जज जूडि एवं एफटीसी सिद्धार्थ कुमार ने 502 वादों का निस्तारण करते हुए 4,670 रुपये जुर्माना वसूला।

एनआई एक्ट और उपभोक्ता अदालत में भी समझौते

विशेष न्यायाधीश, न्यायालय एनआई एक्ट सुरेश चन्द ने 30 वादों का निस्तारण किया। इन मामलों में 1,24,24,335 रुपये की समझौता धनराशि रही। अतिरिक्त न्यायालय प्रथम में 252 वादों का निस्तारण हुआ और 2,45,10,000 रुपये की समझौता धनराशि रही।

अतिरिक्त न्यायालय द्वितीय के पीठासीन अधिकारी पवन प्रताप सिंह ने 86 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 97,15,188 रुपये की समझौता धनराशि रही। अतिरिक्त न्यायालय तृतीय की इंद्रा सिंह ने 102 वादों का निस्तारण करते हुए 77,36,088 रुपये की समझौता धनराशि दर्ज की।

जिला उपभोक्ता न्यायालय के पीठासीन अधिकारी अनिल पुण्डीर ने 43 वादों का निस्तारण किया। इन मामलों में 2,60,83,254 रुपये की समझौता धनराशि रही। स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन प्रमोद कुमार शर्मा ने 7 वादों का निस्तारण किया, जिनमें 11,15,922 रुपये की समझौता धनराशि रही।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जनपद स्थित न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों द्वारा कुल 76,954 वादों का निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत विभिन्न विभागों, न्यायालयों और प्री-लिटिगेशन मामलों को मिलाकर कुल 10,08,279 मामलों का निस्तारण किया गया।

 

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