यूपी के MDM रसोइयों को बड़ी राहत की तैयारी! 62 साल हो सकती है रिटायरमेंट उम्र, सेवा नियमावली बनाने की कवायद तेज
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले लाखों रसोइयों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार अब रसोइयों की सेवा शर्तों को तय करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित की जा सकती है। इसके साथ ही उनके लिए पहली बार विस्तृत सेवा नियमावली तैयार किए जाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नियमावली लागू होने के बाद रसोइयों को नियुक्ति प्रक्रिया, अवकाश और अन्य सेवा संबंधी सुविधाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है।
3.63 लाख रसोइयों पर पड़ेगा असर
राज्य में वर्तमान समय में करीब 1.41 लाख विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत लगभग 1.52 करोड़ बच्चों को प्रतिदिन पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए प्रदेशभर में करीब 3.63 लाख रसोइये कार्यरत हैं। इन सभी को प्रस्तावित सेवा नियमावली का लाभ मिलने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी योजना
स्कूलों में पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की योजना वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लागू की गई थी। शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए शुरू हुई थी।
इसके बाद वर्ष 2007 में पिछड़े विकासखंडों के उच्च प्राथमिक विद्यालयों और 2008 में प्रदेश के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक इस योजना का विस्तार कर दिया गया।
अब तक तय नहीं थीं सेवा शर्तें
वर्तमान में रसोइयों को प्रतिमाह 2,000 रुपये मानदेय दिया जाता है, लेकिन उनके लिए कोई स्पष्ट सेवा नियमावली लागू नहीं है। ग्राम समितियां इनका चयन करती हैं और कई मामलों में इन्हें हटाने का अधिकार भी उन्हीं के पास होता है।
यही वजह है कि कई स्थानों पर 70 से 75 वर्ष तक की आयु के रसोइये भी कार्यरत हैं, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति को लेकर कोई स्पष्ट नियम मौजूद नहीं है।
बैठकों के बाद बनी सहमति
हाल ही में रसोइयों द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद उनकी समस्याओं को लेकर अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर पर इस विषय पर मंथन किया गया।
बैठकों में इस बात पर सहमति बनी कि रसोइयों के लिए स्पष्ट सेवा शर्तें निर्धारित की जानी चाहिए। इसके बाद प्राधिकरण को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
सेवा नियमावली बनने से क्या होगा फायदा?
नई सेवा नियमावली लागू होने पर रसोइयों की सेवानिवृत्ति आयु तय हो जाएगी, जिससे अनिश्चितता खत्म होगी। साथ ही ग्राम समितियों की मनमानी पर भी अंकुश लग सकेगा।
वर्तमान में रसोइयों के लिए किसी प्रकार की छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। प्रस्तावित नियमावली में इन सुविधाओं को शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
मानदेय अवधि बढ़ाने पर भी विचार
सूत्रों के अनुसार, अन्य संविदाकर्मियों की तरह रसोइयों को भी 11 महीने का मानदेय देने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल उन्हें केवल 10 महीने का मानदेय मिलता है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो लाखों रसोइयों को आर्थिक रूप से भी अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।
रसोइयों की लंबे समय से चली आ रही मांग
रसोइयों के संगठन लंबे समय से सेवा नियमावली, निश्चित सेवानिवृत्ति आयु, अवकाश और बेहतर मानदेय की मांग करते रहे हैं। अब सरकार द्वारा इस दिशा में पहल किए जाने से उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी वर्षों पुरानी मांगों का समाधान निकल सकता है।