राम मंदिर दान विवाद में बड़ा एक्शन संभव! जांच के घेरे में पदाधिकारी, कर्मचारी और बैंकिंग नेटवर्क, कई नामों पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली: राम मंदिर में दान संग्रह से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। जांच एजेंसियां और ट्रस्ट प्रशासन मामले की गहन पड़ताल में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दान प्रक्रिया की निगरानी करने वाले जिम्मेदार पदों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे की चर्चा तेज
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से स्वेच्छा से अपने पद छोड़ सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
कैश हैंडलिंग से लेकर बैंकिंग प्रक्रिया तक जांच
जांच एजेंसियां दान राशि की गणना, नकदी प्रबंधन और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं। बताया जा रहा है कि नकदी संभालने वाले कर्मचारियों, गिनती में शामिल कर्मियों और कुछ बैंकिंग स्तर के लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी होती है और किसी भी स्तर पर हुई चूक की जांच आवश्यक है।
एफआईआर और गिरफ्तारी की संभावना
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं जिनके खिलाफ आगे चलकर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कथित वित्तीय गड़बड़ियों में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।
ट्रस्ट प्रशासन की भूमिका भी रडार पर
मामले में ट्रस्ट प्रशासन से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक जवाबदेही तय करने के तहत कुछ महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों के भविष्य को लेकर भी चर्चा चल रही है।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद की सभी नियुक्तियों की पड़ताल
जांच टीम मंदिर परिसर में हुई नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का भी व्यापक ऑडिट कर रही है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक हुए नियुक्ति संबंधी फैसलों, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन तंत्र की विस्तृत जांच की जा रही है। मंदिर परिसर में कार्यरत लगभग 800 कर्मचारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की भी समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षा कर्मी की भूमिका पर भी उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से मंदिर परिसर से जुड़े एक सुरक्षा कर्मी की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है। बताया जा रहा है कि उसकी सेवा अवधि 17 वर्षों से अधिक रही है। जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उसकी जिम्मेदारियां क्या थीं और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या संभावित मिलीभगत के संकेत तो नहीं मिले।
दस्तावेजों और बयानों के आधार पर आगे बढ़ रही जांच
फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी से जुड़े उपलब्ध तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों का विश्लेषण कर रही हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित कार्रवाई को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। इस मामले पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसके निष्कर्षों का असर ट्रस्ट प्रशासन और संबंधित पक्षों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।