हमास पर इजरायल को नहीं भरोसा, नेतन्याहू ने ट्रंप से की बातचीत; गाजा से सेना हटाने पर रखी बड़ी शर्त

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यरुशलम: गाजा युद्ध को लेकर प्रस्तावित समझौते के बीच इजरायल ने हमास के इरादों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इजरायली सरकार का कहना है कि हमास वास्तविक रूप से हथियार छोड़ने के बजाय गाजा में अपनी सैन्य मौजूदगी दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी इस मुद्दे पर बातचीत की है। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं डालता, तब तक उसकी सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

हमास के इरादों पर जताई सुरक्षा चिंता

इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि हमास का उद्देश्य वास्तविक निरस्त्रीकरण नहीं, बल्कि अपनी सैन्य क्षमता को फिर से खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि इसी कारण इजरायल ने अमेरिका के सामने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं दर्ज कराई हैं।

गाजा से सेना हटाने से पहले रखी स्पष्ट शर्त

इजरायल का कहना है कि यदि हमास के पूरी तरह हथियार डालने से पहले सेना को गाजा से हटाया गया तो संगठन दोबारा पूरे इलाके में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही वह अपने सैन्य ढांचे को फिर से खड़ा कर भविष्य में इजरायल के लिए सुरक्षा खतरा पैदा कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल गाजा के 60 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है।

‘पूर्ण निरस्त्रीकरण से कम कुछ स्वीकार नहीं’

डोरोन स्पीलमैन ने कहा कि इजरायल के लिए निरस्त्रीकरण का अर्थ हथियारों का पूर्ण समर्पण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे कम किसी भी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इजरायल का मानना है कि स्थायी शांति के लिए हमास का पूरी तरह हथियार छोड़ना आवश्यक है।

हमास ने पहले जताई थी निरस्त्रीकरण की सहमति

कुछ दिन पहले हमास ने संकेत दिए थे कि अमेरिका की मध्यस्थता से प्रस्तावित युद्धविराम समझौते के तहत वह निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया शुरू करने को तैयार है। इस पहल को गाजा संघर्ष समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इजरायल ने अभी इस पर भरोसा जताने से इनकार किया है।

ट्रंप की योजना में कई अहम प्रस्ताव

प्रस्तावित योजना में हमास के निरस्त्रीकरण, उसकी सुरंगों के नेटवर्क को समाप्त करने, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, तकनीकी विशेषज्ञों वाली नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और गाजा के पुनर्निर्माण जैसे कई प्रमुख बिंदु शामिल बताए गए हैं। हालांकि इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।

 

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