2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज रात, भारत में नहीं आएगा नजर; जानें सही समय, सूतक काल और क्या होंगे नियम

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नई दिल्ली: साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण का चरम रात 11 बजकर 16 मिनट पर रहेगा। पूरी खगोलीय घटना करीब 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगी।

रात 11:16 बजे ग्रहण चरम पर

इस सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को अपनी छाया से ढकता हुआ नजर आएगा। रात करीब 10 बजकर 29 मिनट पर चंद्रमा सूर्य के लगभग 90 फीसदी हिस्से को ढक लेगा। यही इस ग्रहण का सबसे खास चरण माना जा रहा है।

भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण

भारत में रहने वाले लोगों को इस सूर्य ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, तंजानिया, जाम्बिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में पूजा-पाठ, मंदिरों के कपाट बंद करने या रोजमर्रा के कामकाज पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए भी ग्रहण को लेकर किसी विशेष नियम का पालन करना जरूरी नहीं होगा।

ज्योतिष में क्यों खास माना जा रहा है यह ग्रहण?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र में लग रहा है। इस दौरान देवगुरु बृहस्पति के कर्क राशि में उदित होने और शनि के मीन राशि में वक्री रहने का संयोग बताया गया है।

कर्क राशि जल तत्व से जुड़ी मानी जाती है। इसी वजह से ज्योतिषीय आकलन में दुनिया के कुछ हिस्सों में जल से जुड़ी प्राकृतिक घटनाओं की आशंका जताई गई है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे समुद्र तटीय राज्यों को लेकर भी ज्योतिषीय स्तर पर कुछ प्रभाव बताए गए हैं।

भारत की राजनीति पर भी असर की चर्चा

ज्योतिषीय मान्यताओं में भारत की नाम राशि कर्क मानी जाती है। ऐसे में इस ग्रहण को देश के लिए भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक सरकार और जनता के बीच मतभेद या तनाव की स्थिति बन सकती है। राजनीति, प्रशासन और नेतृत्व से जुड़े लोगों के लिए भी समय चुनौतीपूर्ण रहने की बात कही गई है।

ग्रहण के दौरान क्या करें?

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहण के दौरान सूर्य मंत्र, सूर्य स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। ‘ऊं घृणि सूर्याय नमः’ और ‘ऊं सूर्याय नमः’ जैसे मंत्रों के जाप को भी शुभ माना गया है। हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण के दौरान खाना या पानी छोड़ने का कोई प्रमाणित आधार नहीं है। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग अपनी जरूरत के मुताबिक भोजन और पानी लेते रहें। स्वास्थ्य से समझौता नहीं करना चाहिए।

ग्रहण समाप्त होने के बाद धार्मिक मान्यता के अनुसार जरूरतमंदों को दान करने को शुभ माना जाता है। वहीं, जिन स्थानों से सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां इसे सीधे आंखों से देखने से बचना चाहिए और सुरक्षित सोलर फिल्टर या प्रमाणित ग्रहण चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए।

इन राशियों के लिए शुभ बताया जा रहा ग्रहण

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण सकारात्मक रह सकता है। वहीं मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मकर और मीन राशि वालों को कुछ मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

हालांकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर घबराने या किसी तरह की अफवाह पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

 

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