महाराष्ट्र में फिर गरमाया भाषा विवाद, हिंदी बोलने वाले ऑटो-टैक्सी चालकों को एमएनएस की धमकी; फडणवीस ने दिया एक साल का समय
नागपुर: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। राज्य सरकार ने दूसरे राज्यों से आए ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को काम-काज लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय देने का फैसला किया है। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए हिंदी में बात करने वाले चालकों के खिलाफ मारपीट की धमकी दी है।
एमएनएस नेता अमित ठाकरे ने कहा कि अगर कोई ऑटो रिक्शा या टैक्सी चालक हिंदी में बात करते हुए पाया गया तो उनकी पार्टी उसकी पिटाई करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधते हुए मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिए जाने के फैसले पर सवाल उठाया।
अमित ठाकरे ने फैसले पर उठाए सवाल
अमित ठाकरे ने आरोप लगाया कि मराठी भाषा के बजाय उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से जुड़े राजनीतिक लाभ को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो चालकों को 10 या 15 साल का समय दे दे, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि उसे मराठी भाषा और महाराष्ट्र से कितना लगाव है।
उन्होंने कहा कि गुजरात, पंजाब और दक्षिण भारत समेत दूसरे राज्यों में लोग अपनी भाषा से जुड़े हुए हैं। अमित ठाकरे ने उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव का हवाला देते हुए सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए एक साल का समय देने का आरोप लगाया।
फडणवीस ने दूसरे राज्यों के चालकों को दी राहत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में काम करने वाले ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के प्रतिनिधियों की मांग पर उन्हें काम-काज लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का समय देने की घोषणा की।
फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि मराठी की परीक्षा में असफल हुए जिन चालकों को एक सप्ताह पहले नोटिस जारी किए गए थे, उनके खिलाफ एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अप्रैल में सरकार ने जारी किया था भाषा संबंधी फैसला
भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने इस साल अप्रैल में घोषणा की थी कि व्यावसायिक वाहनों के चालकों के लिए राज्य की मुख्य भाषा का काम-काज लायक ज्ञान होना जरूरी होगा। इसी व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आए ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इस फैसले को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया था। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी सरकार के इस निर्णय की आलोचना की थी।