मक्का समझौते में शामिल होने से बांग्लादेश को ‘कोई जोखिम नहीं’, पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी के साथ आने के संकेत; भारत की बढ़ सकती है चिंता

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नई दिल्ली: बांग्लादेश ने मक्का रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया है। ढाका का कहना है कि इस सैन्य समझौते से जुड़ने में उसे कोई जोखिम नजर नहीं आता और इससे दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर के इस बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने रविवार को मक्का रक्षा समझौते को अनूठा समझौता बताया। उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश के लिए नए रणनीतिक अवसर पैदा हो सकते हैं। उनके मुताबिक, ढाका इस मुद्दे पर अपने द्विपक्षीय साझेदार देशों से बातचीत कर रहा है और चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना होगा। उनके अनुसार, किसी एक रक्षा सहयोग में शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि बांग्लादेश दूसरे देशों के साथ अपनी साझेदारी खत्म कर देगा।

पहले भी दे चुका है शामिल होने का संकेत

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान इससे पहले संसद में कह चुके हैं कि अगर बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण मिलता है तो सरकार उस पर सकारात्मक तरीके से विचार करेगी। उन्होंने इसे मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला भी बताया था।

हालांकि, फिलहाल बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है। इसके बावजूद लगातार आ रहे बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि ढाका इस सैन्य सहयोग का हिस्सा बनने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

सात अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते में रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान का प्रावधान भी शामिल है।

इस समझौते को ‘इस्लामिक नाटो’ की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका के घटते प्रभाव के बीच कुछ मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं। मक्का समझौते को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

बांग्लादेश के शामिल होने से भारत की चिंता बढ़ेगी?

बांग्लादेश अगर इस समझौते में शामिल होता है तो भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को लेकर नई चिंता पैदा हो सकती है। पाकिस्तान पहले से ही इस समझौते का हिस्सा है और बांग्लादेश के इसमें शामिल होने से भारत के आसपास के रणनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत और विश्वसनीय संबंध भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भारत ने इस मामले पर फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखता है और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।

बांग्लादेश में ही सैन्य गठबंधन को लेकर उठ रहे सवाल

बांग्लादेश के भीतर भी इस समझौते में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश लंबे समय से गुटनिरपेक्ष नीति पर चलता आया है। ऐसे में किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनना उसकी पारंपरिक विदेश नीति से अलग दिशा में कदम होगा।

पूर्व राजदूत महफुजुर रहमान के मुताबिक, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले से कई क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेश ऐसी स्थिति में नहीं है। उनका कहना है कि भविष्य में यह समझौता बांग्लादेश को किसी सैन्य संघर्ष में खींच सकता है।

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