UP Floods: गंगा-यमुना का जलस्तर घटने से राहत, लेकिन चित्रकूट में मंदाकिनी का कहर; 50 घर पूरी तरह डूबे

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वाराणसी/प्रयागराज/चित्रकूट: उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए गंगा और यमुना के जलस्तर में गिरावट से राहत की उम्मीद जगी है। प्रयागराज और वाराणसी के निचले इलाकों में नदियों का पानी घटने लगा है, लेकिन चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का उफान अब भी भारी तबाही मचा रहा है। रामघाट समेत कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और ऐचवारा में 50 घर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।

प्रयागराज में गंगा-यमुना का पानी घटने लगा

प्रयागराज में मंगलवार को गंगा, यमुना और आसपास की नदियों के जलस्तर में कमी का रुख दिखाई दिया। नैनी में करीब 12 घंटे तक स्थिर रहने के बाद यमुना का जलस्तर घटने लगा। वहीं फाफामऊ में गंगा के बढ़ने की रफ्तार थमने के बाद रात आठ बजे जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि बेलन नदी में 68 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यमुना और टोंस नदी के किनारे बसे गांवों के लिए खतरा बढ़ गया है।

नैनी में चार घंटे में छह सेंटीमीटर घटा यमुना का जलस्तर

नैनी में मंगलवार रात आठ बजे यमुना का जलस्तर 82.22 मीटर दर्ज किया गया। पिछले चार घंटे में जलस्तर छह सेंटीमीटर कम हुआ। इससे पहले दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच जलस्तर में नौ सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई थी।

छतनाग में गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर घटकर 81.78 मीटर पर पहुंच गया। फाफामऊ में गंगा 83 मीटर के करीब पहुंचने के बाद धीमी पड़ गई। चार घंटे में केवल एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई और शाम चार बजे से रात आठ बजे के बीच जलस्तर में एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।

कानपुर बैराज से गंगा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में भी कमी आई है।

अन्य नदियों में भी कमी, लेकिन बेलन को लेकर बढ़ी चिंता

प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति को प्रभावित करने वाली टोंस, बेलन, केन, बेतवा और चंबल नदियों के जलस्तर में भी कमी दर्ज की गई। हालांकि बेलन नदी में दोपहर बाद 60 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई।

विभागीय इंजीनियरों के अनुसार गंगा और यमुना का जलस्तर घटने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे पानी उतरने और जनजीवन सामान्य होने की उम्मीद है। संभावित बारिश को देखते हुए नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

बेलन में पानी छोड़े जाने के बाद बेलन और टोंस नदी के किनारे बसे गांवों पर खतरा बना हुआ है। वहीं फाफामऊ और नैनी में जलस्तर घटने की रफ्तार धीमी होने से भी चिंता बनी हुई है।

राजापुर क्षेत्र के कछारी मोहल्लों में दूसरे दिन भी बाढ़ का पानी मौजूद रहा, जिसके कारण प्रभावित परिवार राहत शिविरों में रह रहे हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ प्रखंड के अधिशासी अभियंता दिग्विजय नारायण शुक्ला के अनुसार जिले की सभी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

चित्रकूट में मंदाकिनी खतरे के निशान से साढ़े चार मीटर ऊपर

धर्मनगरी चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सोमवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से साढ़े चार मीटर ऊपर पहुंच गया।

मंगलवार दोपहर तक रामघाट के आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया। सेमरावल, बरदहा और बाल्मिकी नदियों के उफनाने से हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं।

रामघाट की करीब 200 दुकानें जलमग्न

मंदाकिनी और अन्य नदियों के उफान से मुख्यालय कर्वी से लेकर पाठा तक का इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। सोमवार रात और मंगलवार सुबह हुई बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ा।

रामघाट क्षेत्र में करीब 200 दुकानें पानी में डूब गईं। मंदाकिनी क्षेत्र का टेम्पो स्टैंड, निर्मोही अखाड़ा और पुरानी लंका की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग भी पानी से भर गया।

सीतापुर, तरौंहा, नयागांव, भरतघाट, खटिकाना, मोहकमगढ़ और आरोग्यधाम क्षेत्रों में भी पानी घुसने लगा है। प्रशासन ने इन इलाकों के लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है।

ऐचवारा में 50 घर पूरी तरह डूबे, राहत-बचाव अभियान जारी

ऐचवारा में मुक्तिधाम के आसपास स्थित 50 घर पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। हालात से निपटने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

वहीं सोनभद्र के सठई गांव निवासी आठ वर्षीय शिवम सोनकर मंगलवार दोपहर बराक गांव में पहाड़ी नाले के तेज बहाव में बह गया। शाम को बच्चे का शव बरामद कर लिया गया।

माही (16) और महिमा (14) भी तेज बहाव में बह गईं। दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।

 

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