प्रयागराज: शहर के विस्तार के साथ प्रयागराज में नई कॉलोनियों और आवासीय योजनाओं के नाम रखने का अंदाज भी बदल रहा है। कभी किसी का पता पूछने पर गंज, बाग, विहार या एन्क्लेव जैसे नाम सुनाई देते थे, लेकिन अब ‘पुरम’ नाम तेजी से प्रचलन में आ रहा है। नई आवासीय योजनाओं और निजी कॉलोनियों के नाम में ‘पुरम’ जोड़ने का चलन शहर के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ता जा रहा है। पीडीए की कालिंदीपुरम आवासीय योजना से शुरू हुआ यह सिलसिला अब कई नए इलाकों तक पहुंच चुका है।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में कालिंदीपुरम, शांतिपुरम, गायत्रीपुरम, सरस्वतीपुरम, गंगापुरम, प्रज्ञापुरम, शिवगंगापुरम, गणेशपुरम, मणिजीपुरम, ओंकारपुरम और महावीरपुरम जैसे नाम सामने आ रहे हैं। यानी ‘पुरम’ अब केवल किसी कॉलोनी के नाम का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि नई बसावट की पहचान बनता जा रहा है। ‘पुरम’ शब्द का अर्थ बस्ती या नगर से जुड़ा है। यही वजह है कि सुनियोजित और आधुनिक आवासीय क्षेत्रों के नामकरण में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
कालिंदीपुरम ने प्रयागराज में इस तरह के नामकरण को अलग पहचान दी। इसके बाद नई आवासीय योजनाओं और निजी कॉलोनियों के नाम में भी ‘पुरम’ जुड़ता चला गया। नैनी, झूंसी, फाफामऊ, धूमनगंज, अरैल और शहर के बाहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती नई बसावट ने इस चलन को और विस्तार दिया है।
पुराने मोहल्लों से अलग दिख रही नई बस्तियों की पहचान
प्रयागराज में यह बदलाव केवल कॉलोनियों के नाम तक सीमित नहीं है। पुराने शहर के मोहल्लों के नाम जहां इतिहास, परंपरा, बाजार और स्थानीय पहचान से जुड़े रहे हैं, वहीं नए इलाकों के नाम आधुनिक और सुनियोजित शहर की छवि पेश कर रहे हैं।
रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता उमेश शर्मा के मुताबिक, ‘पुरम’ नाम वाली कॉलोनियों पर नजर डालें तो इनमें एक समानता दिखाई देती है। इन कॉलोनियों का आकार अपेक्षाकृत बड़ा और स्वरूप आदर्श होता है। ‘पुरम’ नाम के जरिए नई और व्यवस्थित आवासीय बस्ती का अहसास कराने की कोशिश भी नजर आती है।
बिल्डरों और विकासकर्ताओं को भी पसंद आ रहा ‘पुरम’
नई कॉलोनियों के नामकरण में ‘पुरम’ के बढ़ते इस्तेमाल की एक वजह यह भी है कि बिल्डर और आवासीय योजनाओं के विकासकर्ता ऐसे नामों को पसंद कर रहे हैं। शहर के विस्तार के साथ नई सड़कें, आवासीय योजनाएं और बस्तियां जुड़ रही हैं और इनके साथ ‘पुरम’ वाले नाम भी बढ़ते जा रहे हैं।
आने वाले समय में प्रयागराज का दायरा बढ़ने के साथ यह चलन और व्यापक होने की संभावना है। यानी शहर में बदलाव सिर्फ सड़कों, मकानों और नई कॉलोनियों के रूप में नहीं हो रहा, बल्कि प्रयागराज की पहचान और नामकरण की भाषा भी धीरे-धीरे बदल रही है।