जरांगे पाटिल को छुआ तो पूरा महाराष्ट्र पहुंचेगा! अभिजीत दीपके की सरकार को सीधी चेतावनी, वांगचुक का दिया उदाहरण

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जालना: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया। जरांगे पाटिल 29 अगस्त से जालना के अंतरवाली सराटी में अपनी 15 मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। मुलाकात के दौरान दीपके ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर जरांगे पाटिल को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश हुई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

दीपके ने सरकार से जरांगे पाटिल के साथ बातचीत करने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को इस मुद्दे का समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

‘जरांगे को छुआ तो पूरा महाराष्ट्र यहां होगा’

अभिजीत दीपके ने सरकार को चेताते हुए कहा कि जरांगे पाटिल को उस तरह जबरन हटाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए, जिस तरह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को उनके भूख हड़ताल स्थल से हटाया था। उन्होंने साफ कहा कि महाराष्ट्र में ऐसा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दीपके के मुताबिक, अगर जरांगे पाटिल को प्रदर्शन स्थल से हटाने या उन्हें छूने की कोशिश की गई तो पूरा महाराष्ट्र वहां पहुंच सकता है। उन्होंने सरकार को जरांगे से संवाद करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी।

15 मांगों को लेकर जारी है जरांगे का अनशन

मनोज जरांगे पाटिल 29 अगस्त से जालना के अंतरवाली सराटी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका आंदोलन मराठा आरक्षण से जुड़ी 15 मांगों को लेकर चल रहा है। जरांगे पाटिल ने इन मांगों के समर्थन में मुंबई तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है।

शनिवार को जरांगे पाटिल मराठा समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में मुंबई मार्च की तारीख तय करने को लेकर फैसला होने की संभावना है।

‘शिक्षा और रोजगार के लिए लड़ रहे हैं जरांगे’

अभिजीत दीपके ने कहा कि मनोज जरांगे पाटिल अपने समुदाय के लोगों के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार ने पर्याप्त शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए होते तो जरांगे को भूख हड़ताल करने की जरूरत नहीं पड़ती।

दीपके ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों और रोजगार के अवसरों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में एक ऐसा जिला बताया जाए, जहां ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल अच्छी तरह संचालित हो रहे हों और लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।

उन्होंने कहा कि जरांगे प्रथमेश देशमुख जैसे छात्रों के भविष्य के लिए सुविधाएं चाहते हैं। प्रथमेश देशमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और उनकी कथित आत्महत्या का भी जिक्र दीपके ने किया। दीपके ने गुरुवार को धाराशिव में देशमुख के परिवार से मुलाकात की थी। उनका कहना है कि प्रथमेश जैसे छात्रों के भविष्य को लेकर भी जरांगे आंदोलन कर रहे हैं।

सरकार बोली- ज्यादातर मांगें पूरी की जा चुकी हैं

दीपके के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि सरकार जरांगे पाटिल की ज्यादातर मांगें पूरी कर चुकी है और इससे समुदाय को लाभ मिलेगा। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल भी इससे पहले कह चुके हैं कि सरकार ने मराठा समुदाय के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं।

इन कदमों में पात्र मराठाओं को अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में शामिल किए जाने के लिए कुनबी प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना भी शामिल है। सरकार के मुताबिक, मराठा आरक्षण के लाभ लागू किए गए हैं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन भी उपलब्ध कराया गया है।

मराठा आरक्षण पर गठित कैबिनेट उपसमिति के प्रमुख मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के अनुसार, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग कोटे से 3.5 लाख से अधिक मराठा युवाओं को लाभ मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग इतनी ही संख्या में लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।

 

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