कुपोषण से जंग जीतकर सामान्य हुआ नन्हा विराज, आंगनवाड़ी की निगरानी और परिवार की मेहनत से बदली सेहत

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गौतमबुद्धनगर: कुपोषण के खिलाफ समय पर पहचान, सही पोषण और लगातार निगरानी किस तरह किसी बच्चे की सेहत बदल सकती है, गौतमपुरी दादरी के नन्हें विराज की कहानी इसकी मिसाल है। 6 अगस्त 2025 को जन्मे विराज को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान स्वास्थ्य और पोषण जांच के लिए आंगनवाड़ी केंद्र लाया गया था। उस समय उसकी उम्र 9 माह थी। जांच में वह मध्यम तीव्र कुपोषण की श्रेणी में पाया गया। इसके बाद आंगनवाड़ी कार्यकत्री और परिवार ने मिलकर उसकी सेहत सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए।

जांच में सामने आई कुपोषण की स्थिति

विराज की जांच के दौरान उसके वजन और शारीरिक वृद्धि का आकलन किया गया। मूल्यांकन में उसके मध्यम तीव्र कुपोषण की श्रेणी में होने की जानकारी सामने आई। समय रहते स्थिति की पहचान होने से उसके पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना शुरू किया गया।

आंगनवाड़ी कार्यकत्री ने परिवार को दिया जरूरी मार्गदर्शन

विराज की स्थिति सामने आने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकत्री सीमा गौतम ने उसके परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा। परिवार को संतुलित और पौष्टिक आहार, घर में उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल, स्वच्छता और बच्चे की नियमित देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई। परिवार ने भी इन सुझावों को गंभीरता से अपनाते हुए बच्चे के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया।

दो से तीन महीने तक लगातार हुई निगरानी

विराज की सेहत में सुधार अचानक नहीं आया। करीब दो से तीन महीने तक उसकी पोषण स्थिति और वृद्धि की लगातार निगरानी की गई। इस दौरान परिवार को समय-समय पर जरूरी पोषण संबंधी सलाह और बच्चे की बेहतर देखभाल के लिए मार्गदर्शन दिया जाता रहा। आंगनवाड़ी कार्यकत्री और परिवार के बीच लगातार समन्वय से उसकी स्वास्थ्य स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा।

अगस्त 2026 में दोबारा जांच में सामने आया सकारात्मक बदलाव

लगातार देखभाल और निगरानी का असर अगस्त 2026 में हुए पुनर्मूल्यांकन में दिखाई दिया। दोबारा स्वास्थ्य और पोषण जांच में विराज कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकलकर सामान्य स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ चुका था। बच्चे की सेहत में हुए इस बदलाव से परिवार में खुशी और राहत का माहौल है।

समय पर पहचान और परिवार की भागीदारी बनी बदलाव की कुंजी

विराज की कहानी यह बताती है कि बच्चों में पोषण संबंधी समस्या की समय पर पहचान, उचित आहार, नियमित निगरानी और परिवार की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस जैसे आयोजनों के जरिए बच्चों की स्वास्थ्य और पोषण स्थिति की समय पर पहचान में मदद मिलती है।

आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां भी परिवारों तक पोषण संबंधी जानकारी और जरूरी मार्गदर्शन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विराज के मामले में भी लगातार निगरानी और परिवार के सहयोग से उसकी स्थिति में सुधार संभव हुआ।

विराज की मुस्कान बनी स्वस्थ बचपन की उम्मीद

नन्हें विराज की कहानी परिवार के लिए खुशी के साथ यह भरोसा भी लेकर आई है कि सही समय पर उठाए गए कदम बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सरकार के पोषण संबंधी प्रयासों, जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों की भूमिका और परिवार के सहयोग से विराज कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकलकर स्वस्थ बचपन की ओर बढ़ा है।

 

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