US Green Card Rules: अमेरिका में आज से बदल गए ग्रीन कार्ड के नियम, इन लोगों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें; भारतीयों पर भी असर

0 23

वाशिंगटन: अमेरिका में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से ग्रीन कार्ड से जुड़े नए नियम लागू हो रहे हैं। नई गाइडेंस के तहत अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा यानी USCIS ‘पब्लिक चार्ज’ के आधार पर अयोग्यता तय करने के लिए आवेदकों की वित्तीय और व्यक्तिगत परिस्थितियों की ज्यादा व्यापक जांच करेगी। इसका असर मुख्य रूप से परिवार और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के आवेदकों पर पड़ सकता है।

नई गाइडेंस 18 सितंबर 2026 या उसके बाद दाखिल किए जाने वाले सभी ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ आवेदनों यानी फॉर्म I-485 पर लागू होगी। पुराने संस्करण के फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

किन बातों की होगी जांच?

नए नियमों के तहत USCIS अधिकारी यह आकलन करेंगे कि आवेदक के भविष्य में सरकारी मदद पर निर्भर होने की संभावना कितनी है। इसके लिए आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, संपत्ति और वित्तीय संसाधन, शिक्षा और कौशल जैसे पहलुओं को देखा जाएगा।

इसके अलावा जहां लागू होगा, वहां ‘फॉर्म I-864 एफिडेविट ऑफ सपोर्ट’ और सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल से जुड़े सबूतों की भी समीक्षा की जा सकती है। अधिकारियों को किसी एक तय पैमाने के बजाय आवेदक की पूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल पर भी नजर

18 सितंबर के बाद लागू होने वाली व्यापक गाइडेंस में आय या जरूरत के आधार पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है। इनमें फूड स्टैम्प, आवास सहायता और मेडिकेड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

वहीं 18 सितंबर से पहले की अवधि में मिलने वाली सुविधाओं में मुख्य रूप से नकद सहायता और लंबे समय तक सरकारी खर्च पर संस्थागत देखभाल जैसे नर्सिंग होम में रहना शामिल था।

आवेदन की तारीख से तय होगा कौन सा नियम लागू होगा

नए प्रावधानों में महत्वपूर्ण बात यह है कि USCIS किसी मामले का आकलन उसकी फाइलिंग तारीख के आधार पर करेगा, न कि फैसले की तारीख के आधार पर।

18 सितंबर 2026 या उसके बाद दाखिल किए गए मामलों पर 2026 की नई और व्यापक गाइडेंस लागू होगी। 23 दिसंबर 2022 से 17 सितंबर 2026 के बीच दाखिल किए गए मामलों में 2022 का सीमित नियम लागू रहेगा, भले ही फैसला 18 सितंबर के बाद आए। वहीं 23 दिसंबर 2022 से पहले दाखिल मामलों पर 1999 की पुरानी अंतरिम फील्ड गाइडेंस लागू होगी।

किन लोगों पर लागू हो सकते हैं नए नियम?

पब्लिक चार्ज से जुड़े नए नियम परिवार आधारित, रोजगार आधारित और डाइवर्सिटी वीजा यानी लॉटरी श्रेणी के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों पर लागू हो सकते हैं। इसमें अमेरिका के अंदर अपना स्टेटस बदलने वाले और विदेश से इमिग्रेंट वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोग शामिल हैं।

इसके अलावा टीपीएस धारक बाद में परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं तो उन पर भी यह नियम लागू हो सकता है। छह महीने यानी 180 दिन से ज्यादा समय अमेरिका से बाहर रहने वाले कुछ स्थायी निवासी भी दोबारा प्रवेश के समय इन प्रावधानों के दायरे में आ सकते हैं।

कुछ विशेष गैर-आप्रवासी वीजा के जरिए अमेरिका में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले लोगों और धार्मिक कार्यों से जुड़े कुछ आवेदकों पर भी ये प्रावधान लागू हो सकते हैं।

इन श्रेणियों को नए नियम से छूट

कुछ श्रेणियों को पब्लिक चार्ज के नियम से छूट दी गई है। इनमें अमेरिकी नागरिक, विशेष श्रेणियों के शरणार्थी और शरण मांगने वाले लोग, स्पेशल इमिग्रेंट जुवेनाइल, टी और यू गैर-आप्रवासी वीजा धारक तथा VAWA के तहत खुद याचिका दाखिल करने वाले लोग शामिल हैं।

क्यूबन एडजस्टमेंट एक्ट के तहत आवेदन करने वाले क्यूबा के नागरिकों को भी छूट प्राप्त है। मौजूदा ग्रीन कार्ड धारक जो केवल अपना स्टेटस नवीनीकृत करा रहे हैं और अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोग भी इस नियम से बाहर हैं।

टीपीएस के लिए आवेदन करने वाले और दोबारा पंजीकरण कराने वाले लोगों को भी छूट है। हालांकि, बाद में परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने पर यह छूट लागू नहीं होगी।

भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदकों पर क्या असर पड़ेगा?

नई गाइडेंस का असर उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में परिवार आधारित या रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं और जिनके मामले 18 सितंबर 2026 या उसके बाद दाखिल किए जाते हैं। ऐसे आवेदनों में वित्तीय संसाधनों, पारिवारिक स्थिति, शिक्षा-कौशल और सरकारी सुविधाओं से जुड़े पहलुओं की व्यापक समीक्षा की जा सकती है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.