बिस्तर से काम और दिनभर AC में रहना… क्या सच में कमजोर कर रहे हैं आपके फेफड़े? जानिए सांस फूलने की असली वजह
नई दिल्ली: आज की बदलती लाइफस्टाइल में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, बिस्तर पर लेटकर लैपटॉप चलाना और लंबे समय तक एसी वाले बंद कमरे में रहना आम हो गया है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इन आदतों से फेफड़े कमजोर होने लगते हैं? दरअसल, लंबे समय तक फिजिकल इनएक्टिव रहने और एसी में रहने से सीधे तौर पर फेफड़े कमजोर नहीं होते, लेकिन शरीर की फिटनेस और सांस लेने की क्षमता पर असर जरूर पड़ सकता है।
क्या फेफड़े सच में कमजोर हो जाते हैं?
खराब लाइफस्टाइल सीधे फेफड़ों को कमजोर नहीं बनाती। फेफड़े लगातार अपना काम करते रहते हैं, लेकिन सही तरीके से सांस लेने के लिए डायाफ्राम, सीने की मांसपेशियों और हृदय का मजबूत होना भी जरूरी है।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहता, तो शरीर का फिटनेस स्तर धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसका असर रोजमर्रा के कामों में नजर आने लगता है। सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या सामान उठाने जैसे सामान्य कामों के दौरान भी सांस फूल सकती है और जल्दी थकान महसूस हो सकती है।
यह समस्या ज्यादा वजन वाले लोगों, बुजुर्गों और पहले से दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों में ज्यादा दिखाई दे सकती है।
AC की हवा से फेफड़ों पर कितना असर?
AC की हवा भी सीधे तौर पर फेफड़ों को कमजोर नहीं करती। समस्या तब हो सकती है जब एसी में रहने के कारण व्यक्ति की बाहरी गतिविधियां और शारीरिक मेहनत कम हो जाए। इसके अलावा एसी की नियमित सफाई न होने, फिल्टर गंदे रहने या कमरे में धूल, फफूंद और प्रदूषण मौजूद होने पर सांस की नली में जलन हो सकती है।
अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों में इससे खांसी, गले में खराश और नाक बंद होने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। एसी की हवा अपेक्षाकृत शुष्क होने के कारण भी कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।
ज्यादातर समय बैठे या लेटे रहने का असर
अगर दिन का ज्यादातर समय बैठकर या लेटकर गुजरता है, तो धीरे-धीरे मांसपेशियों की ताकत और स्टैमिना कम हो सकता है। इसके बाद थोड़ी-सी गतिविधि में सांस फूलने लगती है। कई बार व्यक्ति सांस फूलने के डर से और कम चलना-फिरना शुरू कर देता है। इससे फिटनेस और घट सकती है और सांस फूलने की समस्या का चक्र बढ़ता जाता है।
फेफड़ों और फिटनेस को बेहतर रखने के आसान तरीके
बिस्तर से काम करने या लंबे समय तक बैठने वालों को लगातार एक ही स्थिति में रहने से बचना चाहिए। बीच-बीच में ब्रेक लेकर थोड़ा चलना-फिरना फायदेमंद हो सकता है।
उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार वॉकिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग और डांस जैसी शारीरिक गतिविधियां स्टैमिना बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इसके साथ ही AC के फिल्टर की नियमित सफाई करना, कमरे में ताजी हवा आने देना और धूल-धुएं से बचना भी जरूरी है।
सांस फूलने को सिर्फ लाइफस्टाइल समझकर नजरअंदाज न करें
सांस फूलने की वजह हमेशा खराब लाइफस्टाइल नहीं होती। अगर लगातार खांसी, सीने में जकड़न, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज या बहुत कम काम करने पर भी सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
ऐसे लक्षण अस्थमा, सीओपीडी, हृदय संबंधी बीमारी या एनीमिया जैसी स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।