दवा कारोबारी हत्याकांड में बहू शालू की रिहाई पर आज फैसला! पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट

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कानपुर: दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गई उनकी बहू शालू की रिहाई पर सोमवार को फैसला आ सकता है। पुलिस की जांच में शालू की भूमिका सामने नहीं आने के बाद विवेचक ने सीजेएम कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सोमवार को इस रिपोर्ट पर सुनवाई होनी है। सब कुछ सामान्य रहा तो कोर्ट से रिहाई परवाना जारी हो सकता है, जिसके बाद शालू जेल से बाहर आ सकती हैं।

शालू के पिता नरेश अरोड़ा ने कहा कि जब पुलिस ने उनकी बेटी को हत्याकांड में आरोपित बनाकर जेल भेजा था, तभी से उन्हें भरोसा था कि वह ऐसा नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जिस पुलिस ने शालू को जेल भेजा था, उसी ने अब जांच के बाद उसकी भूमिका नहीं मिलने पर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।

शालू का बेटा श्रीजय इस समय ठाकुरगंज में अपने नाना-नानी के पास है। परिजनों के मुताबिक जेल से बाहर आने के बाद शालू रतन ऑर्बिट स्थित फ्लैट पर जाने के बजाय सीधे अपने मायके जाएगी और बेटे से मुलाकात करेगी।

जांच में शालू की भूमिका नहीं मिली

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, दवा कारोबारी की हत्या की विवेचना के दौरान शालू की भूमिका नहीं मिली। विवेचक ने इसी आधार पर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। सोमवार को इस रिपोर्ट पर सुनवाई होगी। कोर्ट के आदेश के बाद शालू की रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है।

5 सितंबर को फ्लैट में मिला था कारोबारी का शव

कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट के फ्लैट नंबर सी-104 में 5 सितंबर को दवा कारोबारी विनीत मिनोचा का खून से लथपथ शव मिला था। उनके गले और शरीर पर चाकू के 17 गंभीर घाव मिले थे। मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

पूछताछ में विशाल ने शालू के कहने पर हत्या करने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने अगले दिन शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जिन सबूतों के आधार पर शालू गई थीं जेल, जांच में बदली तस्वीर

पुलिस के मुताबिक, शालू को गिरफ्तार करने के पीछे कई साक्ष्य थे। इनमें हत्यारोपी विशाल की ओर से शालू का नाम लिया जाना, सिक्योरिटी गार्ड मदन सिंह को विशाल का नाम शुभम बताकर अपार्टमेंट में प्रवेश दिलाना, घर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग बंद करना और छह लाख रुपये की सुपारी देने की बात शामिल थी।

हालांकि, करीब 18 दिनों तक चली पुलिस जांच में इन साक्ष्यों की कड़ियां कारोबारी के बेटे सुब्रत से जुड़ती चली गईं। पुलिस का कहना है कि पूरी साजिश सुब्रत ने रची और अपनी पत्नी शालू को मामले में फंसा दिया।

पुलिस ने बेटे सुब्रत को भेजा जेल

पुलिस के मुताबिक जांच में सुब्रत की भूमिका सामने आने के बाद गुरुवार को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वहीं, शालू की भूमिका नहीं मिलने पर उसके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। अब कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद तय होगा कि शालू की रिहाई कब होगी।

 

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