भारत की अपनी स्पेस कमान की तैयारी, तीनों सेनाओं की संयुक्त व्यवस्था से बढ़ेगी अंतरिक्ष निगरानी और रक्षा क्षमता
नई दिल्ली: बदलते युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत जल्द ही अंतरिक्ष कमान के गठन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। प्रस्तावित स्पेस कमान तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान होगी और इसका नेतृत्व थल सेना के पास रहने की योजना है। अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्य महत्व को देखते हुए इसे देश की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
तीनों सेनाओं के बीच विमर्श पूरा
अंतरिक्ष कमान के गठन को लेकर थल सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच विमर्श की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद जल्द ही अंतरिम अंतरिक्ष कमान के गठन की घोषणा की जा सकती है। बाद में जरूरी सुधार और बदलाव के बाद इसे स्थायी कमान का स्वरूप दिया जाएगा।
बेंगलुरु स्थित रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी को भी प्रस्तावित कमान से जोड़े जाने की योजना है। इसकी कमान लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी के पास रहने की बात कही जा रही है। इसके अलावा मेजर जनरल स्तर के पांच अधिकारी शामिल होंगे। इनके समकक्ष वायुसेना के तीन और नौसेना के दो अधिकारी भी प्रस्तावित कमान का हिस्सा होंगे।
तीनों सेनाओं की अंतरिक्ष क्षमताओं को एक साथ लाने की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं की अंतरिक्ष से जुड़ी क्षमताओं को एकीकृत करना है। फिलहाल अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित कई जिम्मेदारियां तीनों सेनाओं की अलग-अलग इकाइयों के पास हैं। भविष्य में इन क्षमताओं और संबंधित इकाइयों को एक साथ लाकर अंतरिक्ष कमान के अधीन किया जा सकता है।
कई देशों के पास पहले से स्पेस कमान
दुनिया के कई देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमताएं विकसित की हैं। अमेरिका के पास स्पेस कमान के साथ स्पेस फोर्स भी है। चीन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया और ईरान समेत कई देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सैन्य क्षमताओं का विकास किया है। ब्रिटेन ने भी इस दिशा में पहल की है।
करीब 80 देश वर्तमान में नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम चला रहे हैं। इनमें से कई देश अपनी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए भविष्य में अंतरिक्ष क्षमताओं के सैन्य इस्तेमाल को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में भारत की प्रस्तावित अंतरिक्ष कमान बदलते युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य से जुड़ी तैयारियों का हिस्सा होगी।
उपग्रहों से रियल टाइम निगरानी पर जोर
अंतरिक्ष कमान की प्रमुख जिम्मेदारियों में उपग्रहों के जरिए रियल टाइम निगरानी शामिल होगी। इससे पड़ोसी या विरोधी देशों के भीतर होने वाली गतिविधियों और सीमाओं पर सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। अंतरिक्ष से मिलने वाली सूचनाओं को जमीन पर तैनात सैन्य बलों तक पहुंचाने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
संचार और नौवहन में भी अहम भूमिका
प्रस्तावित कमान की जिम्मेदारियों में सुरक्षित नौवहन और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराना भी शामिल होगा। युद्ध के दौरान जरूरी सामग्री और संसाधनों की आपूर्ति में अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों के जरिए सहयोग किया जा सकेगा।
इसके अलावा प्रस्तावित कमान विरोधी देशों के उपग्रहों की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में हमला करने और विरोधी प्रणालियों को निष्क्रिय या नष्ट करने की क्षमता विकसित करना भी इसकी प्रस्तावित जिम्मेदारियों में शामिल है।
मिसाइल, ड्रोन और खुफिया संकेतों पर भी नजर
अंतरिक्ष कमान आधुनिक तकनीक वाली मिसाइल और ड्रोन प्रणालियों को नष्ट करने की क्षमता विकसित करने पर भी काम करेगी। इसके साथ ही विरोधी पक्ष के खुफिया संकेतों से जुड़ी गतिविधियों से निपटना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
इस तरह भारत की प्रस्तावित अंतरिक्ष कमान के तहत अंतरिक्ष आधारित निगरानी, संचार, नौवहन और सैन्य अभियानों से जुड़ी क्षमताओं को एक संयुक्त व्यवस्था में लाने की तैयारी है।