कौन हैं लाल बिहारी यादव? पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा उम्मीदवार को हराकर फिर बने चर्चा का विषय

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन सीट पर लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा को हराकर जीत दर्ज की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस चुनाव परिणाम के बाद लाल बिहारी यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। समाजवादी पार्टी समर्थित लाल बिहारी यादव ने अपनी जीत का श्रेय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को दिया है।

कौन हैं लाल बिहारी यादव?

लाल बिहारी यादव शिक्षक राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहले भी विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण उनकी पहचान शिक्षक राजनीति के प्रमुख चेहरों में होती है। इस बार भाजपा प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा को हराने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका फिर सुर्खियों में आ गई है।

अखिलेश यादव की नीतियों को दिया जीत का श्रेय

चुनाव में जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार शिक्षकों की समस्याओं को उठाती रही है। उनके मुताबिक, पुरानी पेंशन बहाली, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षकों की सेवा शर्तों जैसे मुद्दे चुनाव में महत्वपूर्ण रहे।

लाल बिहारी यादव ने दावा किया कि शिक्षकों ने इन मुद्दों पर समाजवादी पार्टी के रुख पर भरोसा जताया। उन्होंने भाजपा सरकार की शिक्षा नीतियों पर भी सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक और नीतिगत विचार हैं।

पिछली बार के मुकाबले जीत का अंतर बढ़ने का दावा

लाल बिहारी यादव के अनुसार, पिछली बार उनकी जीत का अंतर करीब 950 वोट था, जबकि इस बार यह बढ़कर 5 हजार से अधिक हो गया। उन्होंने इसे शिक्षकों के बीच अपने समर्थन में बढ़ोतरी का संकेत बताया। हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए आधिकारिक चुनाव परिणाम देखना जरूरी है।

पुरानी पेंशन और शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठाया

जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग दोहराई। उन्होंने वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों और मदरसों के आधुनिक शिक्षकों के मानदेय से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उनका कहना है कि इन वर्गों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। लाल बिहारी यादव की जीत के बाद विधान परिषद में पुरानी पेंशन, मानदेय और शिक्षा नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।

 

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