UP चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा मंथन, प्रियंका गांधी तय करेंगी सपा से गठबंधन का फॉर्मूला; 100-125 सीटों पर नजर

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली में यूपी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के साथ अहम बैठक करने जा रही हैं। इस बैठक में पार्टी की चुनावी तैयारियों, मजबूत विधानसभा क्षेत्रों और सपा के साथ संभावित सीट बंटवारे पर विस्तार से चर्चा होगी। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को कांग्रेस की आगे की रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रियंका गांधी की बैठक में इन तीन मुद्दों पर रहेगा जोर

प्रियंका गांधी के आवास पर होने वाली इस बैठक में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सबसे ज्यादा जोर सपा के साथ सीटों के बंटवारे से पहले अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने पर रहेगा।

कांग्रेस विधानसभा सीटों को ए, बी और सी श्रेणियों में बांटकर अपनी सूची तैयार करेगी। इसके जरिए पार्टी उन सीटों की पहचान करना चाहती है, जहां उसकी स्थिति मजबूत है और जहां चुनाव जीतने की बेहतर संभावनाएं हैं।

इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को आधार बनाकर 80 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का विश्लेषण किया जा रहा है। इनमें वे सीटें शामिल हैं, जहां कांग्रेस ने बढ़त हासिल की थी या दूसरे स्थान पर रही थी।

पार्टी संगठन को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के बाद कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने, जिला समितियों का पुनर्गठन करने और बूथ स्तर तक संगठन की पकड़ मजबूत बनाने की योजना है।

सपा से 100 से 125 सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन का सबसे अहम सवाल सीटों के बंटवारे को लेकर है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 100 से 125 मजबूत विधानसभा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में है। वहीं, सपा का जोर जीत की संभावना और PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के आधार पर सीटों का बंटवारा करने पर है।

गठबंधन से जुड़ी बातचीत में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। दूसरी तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गठबंधन के तहत आपसी सहमति से सीटों का बंटवारा करना चाहते हैं।

कांग्रेस की नजर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन सीटों पर है, जहां उसका पारंपरिक जनाधार रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों और अपने मजबूत संगठन वाले विधानसभा क्षेत्रों पर पकड़ बनाए रखना चाहती है।

सीट बंटवारे पर कहां फंस सकता है पेंच?

सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की राह में सबसे बड़ी चुनौती सीटों की संख्या और उनकी प्राथमिकता को लेकर सामने आ सकती है। कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व मानता है कि विपक्षी एकता के लिए समाजवादी पार्टी को गठबंधन में नेतृत्व की भूमिका देने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पार्टी अपनी राजनीतिक पहचान और हिस्सेदारी से समझौता नहीं करना चाहती।

कांग्रेस इस बार केवल सहयोगी दल के तौर पर चुनाव लड़ने के बजाय मजबूत संगठन और ठोस चुनावी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है। इसके लिए पार्टी सीटों से जुड़े आंकड़ों और पिछले चुनावों के प्रदर्शन को आधार बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

NDA के खिलाफ एकजुट विपक्ष बनाने की चुनौती

उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को चुनौती देने के लिए सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी वोटों का बिखराव रोकने की है।

कांग्रेस और सपा जानती हैं कि अगर दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती है तो इसका असर विपक्ष की चुनावी संभावनाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों पार्टियां गठबंधन को मजबूत बनाने के साथ अपने-अपने राजनीतिक हितों को भी सुरक्षित रखना चाहेंगी।

प्रियंका गांधी की प्रस्तावित बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस कितनी सीटों पर अपनी दावेदारी रखती है और अखिलेश यादव के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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