कृष्णनगरी मथुरा से वृंदावन तक जन्माष्टमी का जश्न, जानिए कहां-कहां होंगे खास आयोजन

मथुरा की जन्मभूमि से वृंदावन के मंदिरों तक कृष्ण भक्ति का रंग

0 178

मथुरा-वृंदावन: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि ब्रज में जन्माष्टमी का उत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और परंपरा का भव्य संगम होता है। जैसे-जैसे जन्माष्टमी का पर्व करीब आता है, मथुरा से लेकर वृंदावन, गोकुल और नंदगांव तक मंदिरों की सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों से पूरा ब्रज कृष्णमय हो जाता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है।

जन्माष्टमी के मौके पर देशभर से श्रद्धालु ब्रज पहुंचते हैं। कोई भगवान कृष्ण की जन्मभूमि के दर्शन के लिए मथुरा आता है तो कोई वृंदावन के प्रसिद्ध मंदिरों में कान्हा के दर्शन करने पहुंचता है। इस दौरान प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, झांकियां और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव का आयोजन होता है।

मथुरा में जन्मभूमि पर होगा भव्य जन्मोत्सव

मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए यहां जन्माष्टमी का सबसे खास आकर्षण श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में होने वाला मध्यरात्रि जन्मोत्सव रहता है।

मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात मंदिरों में विशेष पूजा और जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है। मध्यरात्रि के समय भगवान के जन्म की प्रतीकात्मक लीला और आरती के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं।

वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर का अलग रंग

मथुरा के बाद जन्माष्टमी के दौरान सबसे ज्यादा आकर्षण वृंदावन का रहता है। यहां बांके बिहारी मंदिर समेत कई प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

वृंदावन की गलियों में जन्माष्टमी के दौरान भक्तों की भीड़, राधे-राधे के जयकारे और भजन-कीर्तन का माहौल देखने को मिलता है। बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी से जुड़े विशेष दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहते हैं।

इस्कॉन मंदिर में भी विशेष आयोजन

वृंदावन का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को भक्ति और संकीर्तन के साथ मनाया जाता है। मंदिर की ओर से जन्माष्टमी के लिए विशेष सेवा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस्कॉन और कई वैष्णव परंपराओं में इस साल जन्माष्टमी का मुख्य observance 5 सितंबर को पड़ता है, जबकि अधिकांश स्थानों पर जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जा रही है। तारीख में यह अंतर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पंचांग गणना के कारण है।

प्रेम मंदिर में दिखेगी भव्य सजावट

वृंदावन का प्रेम मंदिर भी जन्माष्टमी के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है। मंदिर परिसर की रोशनी और सजावट त्योहार के माहौल को और खास बना देती है। इस साल प्रेम मंदिर में 4 सितंबर की शाम से जन्माष्टमी से जुड़े विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होने की जानकारी सामने आई है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.