देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम, रात 11:57 से 12:42 तक रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त; जानें पूजन विधि और जरूरी सामग्री

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नई दिल्ली: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती, श्रीकृष्ण जयंती, यदुकुलाष्टमी और अष्टमी रोहिणी जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल यह त्योहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की विशेष पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दौरान लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं तथा उन्हें पालने में विराजमान कर झुलाया जाता है। आइए जानते हैं इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि और जन्माष्टमी के विशेष उपाय।

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर को अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। आज श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए कुल 45 मिनट का समय मिलेगा। इसी अवधि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी के पर्व में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट पर लग चुका है और आज रात 11 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगा।

जन्माष्टमी की पूजा के लिए क्या-क्या चाहिए?

लड्डू गोपाल की पूजा और श्रृंगार के लिए बाल गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और ताजे फूल मुख्य रूप से रखे जाते हैं। भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत तैयार किया जाता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होते हैं।

भोग के लिए माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतुफल, मिठाई और पान-सुपारी रखी जाती है। भोग में तुलसी दल मिलाना धार्मिक रूप से बेहद जरूरी माना जाता है।

मध्यरात्रि में ऐसे करें लड्डू गोपाल की पूजा

जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल और मंदिर की अच्छी तरह सफाई कर उसे सजाएं। इसके बाद बाल गोपाल के लिए सुंदर झूला तैयार करें।

मुख्य पूजा मध्यरात्रि में की जाती है। इस समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें।

श्रृंगार के बाद बाल गोपाल को झूले में विराजमान कराएं और श्रद्धा के साथ झूला झुलाएं। उन्हें माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत और फलों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल मिलाना अनिवार्य माना गया है। अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें, पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

जन्माष्टमी पर इन मंत्रों का कर सकते हैं जाप

– कृं कृष्णाय नमः
– ऊं देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात
– ओम क्लीम कृष्णाय नमः
– गोकुल नाथाय नमः
– ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम:

जन्माष्टमी पर किए जाने वाले विशेष उपाय

जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव के बाद केसर मिश्रित दूध से उनका अभिषेक करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

इसके अलावा जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है।

 

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