नई दिल्ली में धारा 163 लागू, भीड़ जुटाने पर रोक; पुलिस और CAPF के हजारों जवान तैनात

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नई दिल्ली: राजधानी में संभावित विरोध प्रदर्शनों और मार्च को देखते हुए पूरे नई दिल्ली इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंध लागू किया गया है। शनिवार को मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, दिल्ली पुलिस मुख्यालय और भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय के बाहर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। किसी भी अचानक होने वाले प्रदर्शन से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस के करीब 10,000 जवानों को रिजर्व में रखा गया है।

जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक कड़ी निगरानी

नई दिल्ली के प्रमुख इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। जंतर-मंतर पर बैरिकेड लगे हुए हैं, जबकि अशोक रोड गोलचक्कर के पास और टॉल्स्टॉय मार्ग तथा संसद मार्ग के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अशोक रोड और जय सिंह रोड पर भी अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए हैं।

यह सुरक्षा व्यवस्था वामपंथी संगठनों की ओर से नए सिरे से विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका के मद्देनजर की गई है। शुक्रवार को कनॉट प्लेस और उसके आसपास करीब 2,000 लोग ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन के लिए जुटे थे। फिलहाल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ या कांग्रेस की ओर से किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा नहीं की गई है।

पुलिस मुख्यालय के बाहर महिला मार्च की आशंका

दिल्ली पुलिस मुख्यालय और भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। अधिकारियों को सूचना मिली है कि कुछ वामपंथी संगठन पुलिस मुख्यालय के बाहर महिलाओं का मार्च निकाल सकते हैं। इन संगठनों ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से यौन हिंसा की गई।

एक अधिकारी के अनुसार, खुफिया शाखा से मिले इनपुट के आधार पर सुबह मार्च निकाले जाने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। चूंकि नई दिल्ली इलाके में विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, इसलिए प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस का कहना है कि किसी भी अप्रत्याशित प्रदर्शन से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

CAPF की 200 से अधिक कंपनियां तैनात

विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 से अधिक कंपनियां तैनात हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इन कंपनियों में लगभग 20,000 पुरुष और महिला जवान शामिल हैं। सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी तैनाती मध्य दिल्ली में की गई है, जहां जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य प्रमुख मंत्रियों के आवासों के बाहर भी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस के करीब 10,000 जवानों को भी विरोध प्रदर्शनों और मार्च की स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व में रखा गया है।

शुक्रवार को कनॉट प्लेस में जुटे थे करीब 2,000 लोग

शुक्रवार शाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन के लिए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में करीब 2,000 लोग जुटे थे। यह प्रदर्शन शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित था, लेकिन इसके लिए पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। इसके बावजूद संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और CAPF के जवानों की तैनाती गुरुवार से ही बढ़ा दी गई थी।

शुक्रवार दोपहर तक सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों ने सेंट्रल पार्क को घेर लिया था और उसके सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे, ताकि लोग पार्क के अंदर प्रवेश न कर सकें।

प्रदर्शनकारियों को हटाया, करीब 150 लोग हिरासत में लिए गए

शुक्रवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में फ्लैग मार्च किया। घटनास्थल के पास लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई, जिसमें पत्रकारों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। शाम करीब 7:30 बजे तक पुलिस ने कनॉट प्लेस से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया था। रात करीब 9 बजे तक लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कनॉट प्लेस में अभी भी सुरक्षा बल तैनात हैं, ताकि किसी नए विरोध प्रदर्शन को रोका जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

 

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