नेपाल में इतने भारतीय क्यों थे? 500 विदेशी लापता, विदेश मंत्री ने बताया किस यात्रा पर निकले थे लोग

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काठमांडू: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, आपदा में अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। इनमें करीब 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कुल मिलाकर करीब 500 विदेशी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल सरकार प्रभावित लोगों की तलाश और राहत-बचाव अभियान में जुटी है।

लापता भारतीयों में ज्यादातर मानसरोवर यात्री

विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि प्रभावित इलाके से होकर विदेशी नागरिक मानसरोवर यात्रा के लिए जाते हैं। इसी मार्ग से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी यात्रा करते हैं। बाढ़ के बाद करीब 300 भारतीयों के लापता होने की जानकारी मिली है और नेपाल सरकार उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

कुल 500 विदेशी नागरिक संपर्क से बाहर

शिशिर खनाल के अनुसार, इस समय करीब 500 विदेशी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल सरकार उनकी स्थिति का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

दूसरे देशों के दूतावासों से संपर्क

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर दूसरे देशों के दूतावासों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और उनका कल्याण नेपाल के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपने नागरिकों की सुरक्षा।

कुछ ही घंटों में तबाह हो गए कई शहर

खनाल ने अचानक आई बाढ़ को हाल के समय में नेपाल की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया। उनके मुताबिक, शुरुआती आकलन में सामने आया है कि कुछ ही घंटों के भीतर एक के बाद एक कई शहर पूरी तरह तबाह हो गए। हजारों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है।

भारत की मदद के लिए नेपाल ने जताया आभार

नेपाल के विदेश मंत्री ने राहत और बचाव कार्यों को तत्काल प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से राहत सामग्री पहले ही भेजी जा चुकी है। खनाल ने भारत की ओर से मिली त्वरित सहायता के लिए नई दिल्ली का आभार जताया।

दुनिया से नेपाल के साथ खड़े होने की अपील

खनाल ने संकट की इस घड़ी में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल के साथ खड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत के साथ-साथ देश के पुनर्निर्माण के लिए भी दुनिया का सहयोग जरूरी होगा। उनके मुताबिक, पर्यटन नेपाल को दोबारा खड़ा करने की कोशिशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पोखरा और एवरेस्ट क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुले

विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल के ज्यादातर हिस्से बाढ़ से प्रभावित नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश पर्यटन क्षेत्र अब भी खुले हैं। पोखरा और माउंट एवरेस्ट क्षेत्र पर्यटकों के लिए खुले और सुरक्षित हैं। उन्होंने लोगों से नेपाल आने और पर्यटन के माध्यम से देश के पुनर्निर्माण में योगदान देने की अपील की।

‘नेपाल फिर मजबूती से खड़ा होगा’

शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल इससे पहले भी बड़ी त्रासदियों का सामना कर चुका है और हर बार मजबूती से उभरा है। उन्होंने 2015 के विनाशकारी भूकंप का उदाहरण देते हुए भरोसा जताया कि नेपाल इस आपदा से भी उबर जाएगा। फिलहाल सरकार का मुख्य ध्यान लापता लोगों की तलाश, बचाव और तत्काल राहत पर है।

तमिलनाडु के 37 पर्यटकों का पता नहीं

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा ओडिशा समेत कई राज्यों ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों के लिए सहायता केंद्र और हेल्पलाइन शुरू की हैं। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के मुताबिक, कम से कम 59 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु हैं। बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था बाधित होने से प्रभावित भारतीयों के बारे में फिलहाल सीमित जानकारी ही मिल पा रही है।

तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार, राज्य से नेपाल गए 57 पर्यटकों में से 37 का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है। बताया गया है कि ये पर्यटक हिमालय स्थित एक मंदिर की यात्रा पर जा रहे थे।

ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी लापता

कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संगठन ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं। संगठन के अनुसार, ये लोग आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। बाद में नेपाल सरकार ने भी बताया कि संबंधित आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

राकेश टिकैत भी नेपाल में फंसे

उत्तर प्रदेश के कई लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका है। किसान नेता राकेश टिकैत भी अपने सहयोगियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे और पोखरा में फंसे हुए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण वे विमान से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से दिल्ली के लिए उड़ान लेंगे। सड़क मार्ग से यात्रा संभव नहीं होने के कारण उन्हें अपने वाहन नेपाल में ही छोड़ने पड़ेंगे।

महाराष्ट्र के सात पर्यटक फंसे, चार सुरक्षित

महाराष्ट्र के सात पर्यटक भी अचानक आई बाढ़ के कारण नेपाल में फंस गए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, इनमें से चार के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य तीन से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर नजर रखने के लिए चौबीसों घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है।

 

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