पंजाब में 3 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ेंगी मुश्किलें, 3,000 सरकारी बसों के पहिए थमे; जानें क्या हैं मांगें
चंडीगढ़: पंजाब में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 से सरकारी कामकाज और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर हड़ताल का असर पड़ने की आशंका है। राज्य के तीन लाख से ज्यादा कर्मचारियों के आकस्मिक अवकाश पर जाने के ऐलान के बीच पंजाब रोडवेज, पनबस और पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) के ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे राज्य की 3,000 से अधिक सरकारी बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। कर्मचारियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार लिखित अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बस सेवाएं ठप होने से यात्रियों की बढ़ेंगी मुश्किलें
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कर्मचारियों की हड़ताल का असर स्थानीय और अंतरराज्यीय बस सेवाओं पर पड़ रहा है। यूनियन के मुताबिक, मंगलवार दोपहर बाद से ही चालकों ने रात्रि ठहराव वाली बस सेवाएं चलाने से इनकार करना शुरू कर दिया था। बसों को वापस डिपो में खड़ा कर दिया गया।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि बुधवार सुबह पहली पाली से कोई भी सरकारी बस डिपो से बाहर नहीं निकलेगी। ऐसे में पंजाब के साथ चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नौकरीपेशा लोगों से लेकर छात्रों तक पर पड़ेगा असर
बस सेवाएं बाधित होने से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकारी बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों के अलावा मुफ्त बस सफर योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को भी परेशानी होने की आशंका है।
परिवहन सेवाओं के प्रभावित होने से यात्रियों को निजी वाहनों और दूसरे उपलब्ध साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। हालांकि, बसों का संचालन कब तक सामान्य होगा, यह सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।
क्या हैं रोडवेज कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल और महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों के मुताबिक, सरकार और प्रशासन के साथ 70 से ज्यादा दौर की बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इसी वजह से कर्मचारियों को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- ठेके पर काम कर रहे चालकों, परिचालकों और वर्कशॉप के मैकेनिकों की सेवाएं विभाग के सेवा नियमों के तहत नियमित की जाएं।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे विभाग के अनुबंध के तहत लाया जाए।
- भर्ती करने वाली बिचौलिया एजेंसियों की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- पिछले प्रदर्शनों के दौरान परिवहन कर्मचारियों पर दर्ज सभी पुलिस प्राथमिकी बिना शर्त वापस ली जाएं।
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर लिखित सरकारी आदेश जारी होने तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
विधानसभा सत्र के बीच सरकार पर दबाव
कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि पहले सरकार सेवा नियमों में बदलाव के लिए अलग विधानसभा सत्र बुलाने में असमर्थता जताती थी। अब राज्य में विधानसभा सत्र चल रहा है, इसलिए सरकार को इस मौके पर जरूरी कदम उठाने चाहिए।
यूनियन की मांग है कि राज्य मंत्रिमंडल सेवा नियमों में संशोधन के मसौदे को मंजूरी दे और आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करे। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर लिखित अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।