इस्लामाबाद: पाकिस्तान में साल 2026 का पांचवां पोलियो मामला सामने आया है। खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में 17 महीने की बच्ची में पोलियो वायरस की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल सामने आए पांच मामलों में से चार मामले इसी प्रांत से हैं, जबकि एक मामला सिंध में दर्ज किया गया है।
बन्नू की संक्रमित बच्ची डोमेल तहसील के खंडार खानखेल यूनियन काउंसिल की रहने वाली बताई गई है। राष्ट्रीय आपातकालीन संचालन केंद्र के एक अधिकारी ने मामले की जानकारी दी है। पाकिस्तान के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम की ओर से भी बच्ची में संक्रमण की पुष्टि की गई है।
खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो के 4 मामले
पाकिस्तान में 2026 में अब तक सामने आए पांच पोलियो मामलों में चार खैबर पख्तूनख्वा से हैं। इनमें तीन मामले अकेले बन्नू जिले से सामने आए हैं।
दक्षिणी खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो वायरस के संक्रमण को लेकर लगातार निगरानी की जरूरत बताई जा रही है। अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बच्चों तक पहुंच बनाना और उनका टीकाकरण करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सिंध में भी मिला एक संक्रमित बच्चा
इस साल पाकिस्तान में पोलियो का एक मामला सिंध से भी सामने आया है। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में मामलों की संख्या में कमी बताई जा रही है, लेकिन देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं पोलियो उन्मूलन अभियान के सामने चुनौती बनी हुई हैं।
बन्नू को विशेष रूप से संवेदनशील इलाका माना जा रहा है। यहां टीकाकरण अभियान प्रभावित होने और पोलियो कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी धमकियां मिलने की खबरें सामने आती रही हैं।
सुरक्षा का डर, टीकाकरण अभियान पर असर
पाकिस्तान में पोलियो टीकाकरण अभियान को लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ता है, जिससे टीकाकरण अभियान लगातार चलाना मुश्किल हो जाता है।
जब स्वास्थ्यकर्मियों की आवाजाही प्रभावित होती है तो उन बच्चों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, जिन्हें पोलियो की खुराक की जरूरत होती है। बन्नू जैसे इलाकों में यह समस्या और गंभीर मानी जा रही है।
बन्नू से वायरस फैलने की आशंका
पोलियो विशेषज्ञ पहले भी बन्नू में सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यहां वायरस के दोबारा फैलने का खतरा बना हुआ है।
ऐसे में बच्चों की लगातार निगरानी और टीकाकरण अभियान को जारी रखना जरूरी माना जा रहा है। खासकर उन इलाकों में स्वास्थ्य टीमों की पहुंच बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है, जहां सुरक्षा कारणों से अभियान प्रभावित होता है।
क्या है पोलियो और कितना खतरनाक है?
पोलियो एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है। संक्रमण गंभीर होने पर यह स्थायी लकवे का कारण बन सकता है और कुछ मामलों में मरीज की मौत भी हो सकती है।
पोलियो संक्रमण का कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन टीकाकरण के जरिए इस बीमारी से प्रभावी तरीके से बचाव किया जा सकता है। यही वजह है कि बच्चों का समय पर टीकाकरण और संक्रमण की निगरानी पोलियो उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।