योगी सरकार की समावेशी शिक्षा पहल को रफ्तार, प्रशस्त 2.0 से जुड़े 9.20 लाख शिक्षक; विशेष जरूरत वाले बच्चों पर फोकस

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए योगी सरकार प्रशस्त 2.0 कार्यक्रम के जरिए शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण दे रही है। इस पहल का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करना, उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझना और उन्हें बेहतर शिक्षण सहयोग उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में 9,20,169 शिक्षक इस कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं, जबकि 8,15,309 शिक्षक प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख चुके हैं।

प्रशस्त 2.0 से शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण

प्रशस्त 2.0 के तहत शिक्षकों को डिजिटल माध्यम से समावेशी शिक्षा से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी जरूरतों के अनुसार शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के कुल 16,29,945 शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत शिक्षक कार्यक्रम से जुड़ चुके थे, जबकि करीब 50 प्रतिशत ने प्रशिक्षण के सभी वीडियो पूरे कर लिए थे।

रामपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में बेहतर सहभागिता

कार्यक्रम के तहत शिक्षकों की भागीदारी के मामले में कुछ जिलों में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रामपुर में 90.5 प्रतिशत, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक प्रशस्त 2.0 से जुड़ चुके थे।

वहीं, सभी प्रशिक्षण वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3, पीलीभीत में 84.6 और लखीमपुर खीरी में 82.5 दर्ज किया गया। ये आंकड़े डिजिटल प्रशिक्षण के प्रति शिक्षकों की भागीदारी को दर्शाते हैं।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान पर जोर

समावेशी शिक्षा का उद्देश्य हर बच्चे की क्षमता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसे सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की अलग-अलग शैक्षिक आवश्यकताओं को समझने और उन्हें उचित सहयोग देने के लिए तैयार किया जा रहा है।

विद्यालयों में शिक्षक बच्चों के साथ नियमित संवाद और शिक्षण गतिविधियों के जरिए उनकी जरूरतों को समझ सकते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की समझ विकसित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा हासिल करने में जरूरी मदद मिल सके।

तकनीक और संवेदनशीलता से बेहतर होगा शिक्षण परिवेश

प्रशस्त 2.0 कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराकर शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चों की विविध जरूरतों को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से समावेशी शिक्षा को मजबूत करने और शिक्षकों को इस दिशा में अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल में तकनीक के साथ बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने पर सरकार का जोर

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जसंदीप सिंह के मुताबिक, सरकार समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित कर बच्चों की शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

वहीं, स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने को महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुसार सहयोग देने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है।

 

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