हूती हमलों से बढ़ा सऊदी में सुरक्षा संकट! क्राउन प्रिंस MBS की सुरक्षा बढ़ने की खबर, रियाद एयरपोर्ट पर फिर बरसे ड्रोन-मिसाइल

0 25

रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की सुरक्षा को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बढ़ते खतरे को देखते हुए उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि 41 वर्षीय क्राउन प्रिंस को बंकर जैसी सुरक्षा सुविधाओं वाले भारी सुरक्षा वाले महलों में ले जाया जा रहा है। उनकी सुरक्षा के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है। हालांकि, सऊदी सरकार ने इस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

ऐसे में इसे क्राउन प्रिंस पर किसी पुष्ट हमले की खबर के तौर पर नहीं देखा जा सकता, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच एहतियाती कदम के रूप में देखा जा रहा है।

रियाद एयरपोर्ट पर हमलों से मचा हड़कंप

10 अक्टूबर को रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले ने सऊदी अरब को झकझोर दिया। एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए।

इस हमले को एक दशक से अधिक समय में सऊदी अरब पर हुए सबसे गंभीर हमलों में से एक बताया जा रहा है। इसके अगले दिन 11 अक्टूबर को एयरपोर्ट को फिर निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।

लगातार हो रहे हमलों के बाद रियाद एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पांच दिनों के भीतर एयरपोर्ट को चार बार निशाना बनाया गया, जिसके बाद संचालन रोकने का फैसला लिया गया। 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट को 17 अक्टूबर तक बंद रखने की जानकारी दी गई थी।

सऊदी एयर डिफेंस पर उठे सवाल, जांच शुरू

लगातार हमलों के बाद सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली की क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है कि मिसाइल और ड्रोन हमलों को समय रहते रोकने में एयर डिफेंस सिस्टम क्यों नाकाम रहा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले के दौरान पहले कई ड्रोन भेजे गए और उसके बाद क्रूज तथा बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन हमलों की पहले से चेतावनी क्यों नहीं मिल सकी।

हूती विद्रोहियों के पास मौजूद कुछ मिसाइल प्रणालियों में उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता भी बताई जाती है, जिससे सऊदी अरब के लिए चुनौती और बढ़ गई है। इस घटनाक्रम ने देश के सैन्य, आर्थिक और नागरिक ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

क्या हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा अमेरिका?

इन हमलों के बीच अमेरिका की भूमिका पर भी दुनिया की नजरें टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अब तक सीधे सैन्य अभियान शुरू करने का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सऊदी अरब लंबे समय से अमेरिका से हूती हमलों के खिलाफ ज्यादा प्रत्यक्ष मदद की मांग करता रहा है। अभी तक वाशिंगटन की भूमिका में खुफिया जानकारी साझा करना, लक्ष्य पहचान और सैन्य योजना में सहयोग शामिल रहा है।

अगर अमेरिका सीधे कार्रवाई करता है तो संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात भी प्रभावित होने का खतरा है, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है।

सऊदी अरब ने दी सख्त प्रतिक्रिया की चेतावनी

सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने 12 अक्टूबर को रियाद में आयोजित विश्व पेट्रोलियम ऊर्जा कांग्रेस के दौरान कहा कि हालिया घटनाएं बेहद गंभीर हैं और सऊदी अरब की प्रतिक्रिया भी उसी स्तर की होनी चाहिए।

उनके बयान को हूती हमलों के खिलाफ सऊदी अरब के कड़े रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई हवाई अड्डों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती समूह ने मक्का और मदीना को छोड़कर सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डों को असुरक्षित क्षेत्र बताया है। इससे विमान सेवाओं और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

रियाद एयरपोर्ट बंद होने से उड़ानों पर असर

रियाद एयरपोर्ट बंद होने का असर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर भी पड़ा है। कई विदेशी एयरलाइंस ने सुरक्षा कारणों से अपनी उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी हैं।

लुफ्थांसा समूह ने रियाद की उड़ानें 16 अक्टूबर तक रद्द की थीं, जबकि एयर फ्रांस-KLM ने रियाद आने-जाने वाली उड़ानों पर रोक महीने के अंत तक बढ़ाई थी। एतिहाद और कतर एयरवेज ने भी क्षेत्रीय हालात को देखते हुए उड़ानों में बदलाव किए हैं।

अमेरिकी फेडरल एविएशन प्रशासन और यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी ने भी सऊदी हवाई क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है।

क्यों बढ़ी सऊदी अरब और हूतियों के बीच दुश्मनी?

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष की जड़ें यमन के लंबे गृहयुद्ध से जुड़ी हैं। साल 2015 में सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन का नेतृत्व करते हुए यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया था।

ईरान समर्थित माने जाने वाले हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब के शहरों, तेल प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाते रहे हैं।

2022 में दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम के बाद हिंसा में कमी आई थी, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और यमन में दोबारा बढ़ती गतिविधियों ने हालात को फिर गंभीर बना दिया है।

रियाद एयरपोर्ट पर लगातार हमलों, नागरिकों की मौत और क्राउन प्रिंस की सुरक्षा को लेकर सामने आई खबरों ने खाड़ी क्षेत्र के संकट को और गहरा कर दिया है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.