ईरान की ताकत बढ़ाने में रूस की गुप्त मदद? सुपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम का खुलासा, अमेरिका के लिए बढ़ सकती है मुश्किल

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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग के बीच रूस और ईरान के सैन्य सहयोग को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के लिए बेहद संवेदनशील सैन्य तकनीक गुप्त रूप से उपलब्ध कराने का आरोप लगा है। बताया गया है कि C430L नाम का यह कार्यक्रम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और इसमें रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ भी शामिल हैं। अगर ईरान इस तकनीक को विश्वसनीय रूप से विकसित कर लेता है तो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसेना के लिए नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

क्या है C430L कार्यक्रम?

रिपोर्ट के अनुसार, C430L कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ईरान को रैमजेट इंजन से जुड़ी तकनीक विकसित करने में सहायता देना है। इस तकनीक के इस्तेमाल से क्रूज मिसाइलों को आवाज की गति से कई गुना अधिक रफ्तार से उड़ाने की क्षमता हासिल हो सकती है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए लीक हुई रूसी बातचीत, यात्रा संबंधी रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट का विश्लेषण किया गया है। दावा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान भी यह कार्यक्रम चलता रहा।

ईरान लंबे समय से चाहता था ऐसी मिसाइल तकनीक

ईरानी मिसाइलों के विशेषज्ञ और कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, रूस की ओर से ऐसी रणनीतिक और संवेदनशील सैन्य तकनीक का हस्तांतरण बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, ईरान लंबे समय से इस तरह की तकनीक हासिल करना चाहता था और इतने बड़े कार्यक्रम के लिए रूस के उच्चतम राजनीतिक स्तर से मंजूरी की जरूरत हो सकती है।

जहाज रोधी मिसाइलों में हो सकता है इस्तेमाल

रैमजेट तकनीक का इस्तेमाल जहाज रोधी और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की खासियत उनकी अत्यधिक गति के साथ कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें रडार और वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा पहचानने तथा रोकने के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता है। यही वजह है कि इस तरह की तकनीक किसी देश की मारक क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकती है।

अमेरिकी नौसेना के लिए क्यों बढ़ सकता है खतरा?

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट प्रणोदन प्रणाली विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी किया जा चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरान ने सैन्य रूप से तैनात कर दी है। पूर्व सीआईए सैन्य विश्लेषक और जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज से जुड़े जिम लैम्सन के अनुसार, यह ईरान को एक नई रणनीतिक हथियार क्षमता दे सकती है और अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

लीक हुई बातचीत से यह संकेत भी मिलने का दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा इस गर्मी तक जारी थी।

रूस और ईरान की सैन्य दोस्ती लगातार मजबूत

पिछले कुछ वर्षों में रूस और ईरान के बीच सैन्य एवं रणनीतिक संबंधों में तेजी से मजबूती आई है। ईरान ने रूस को शाहेद हमलावर ड्रोन उपलब्ध कराए हैं, जिनका यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती रही है। ईरान ने रूस में इन ड्रोन के उत्पादन की व्यवस्था स्थापित करने में भी मदद की है।

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन और पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने रूस पर ईरान को उसके अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान युद्ध से संबंधित सहायता देने का आरोप भी लगाया है। इसमें उपग्रह तस्वीरें, ड्रोन से जुड़ी सहायता और हथियारों के कलपुर्जे उपलब्ध कराने जैसे दावे शामिल हैं।

अमेरिका के लिए क्यों चिंता बढ़ाने वाली खबर?

यदि रूस की मदद से ईरान सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की भरोसेमंद क्षमता हासिल कर लेता है, तो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं के सामने सुरक्षा चुनौती बढ़ सकती है। इस क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत और अन्य सैन्य संसाधन तैनात हैं। तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलें मौजूदा वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया के लिए कम समय दे सकती हैं। खासकर जहाज रोधी क्षमता विकसित होने की स्थिति में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि रूस की सहायता से विकसित ऐसी कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरान ने तैनात कर दी है।

 

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