गृह प्रवेश में सबसे पहले क्यों रखते हैं दाहिना पैर? जानिए धार्मिक मान्यता और माता लक्ष्मी से जुड़ा महत्व
नई दिल्ली: नए घर में प्रवेश करना हर परिवार के लिए खास पल होता है। इस मौके पर पूजा-पाठ और कई पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है घर के मुख्य द्वार से भीतर कदम रखते समय सबसे पहले दाहिना पैर आगे बढ़ाना। धार्मिक मान्यताओं में इसे शुभ शुरुआत, सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि गृह प्रवेश के दौरान पंडित भी दाहिने पैर से घर में प्रवेश करने की सलाह देते हैं।
गृह प्रवेश में दाहिना पैर रखना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू परंपराओं में शरीर के दाहिने हिस्से को शुभ कार्यों से जोड़कर देखा जाता है। पूजा-पाठ में दाहिने हाथ का इस्तेमाल करने, दान-पुण्य करने और मंदिर में प्रवेश के दौरान दाहिना पैर आगे रखने जैसी परंपराएं इसी मान्यता से जुड़ी हैं।
नए घर में पहला कदम दाहिने पैर से रखना भी शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यह घर में सुख, शांति और खुशहाली के स्वागत का संकेत है। हालांकि, ये मान्यताएं परंपरा और आस्था पर आधारित हैं।
माता लक्ष्मी से क्या है दाहिने पैर का संबंध?
हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। गृह प्रवेश से पहले घर के मुख्य द्वार की सफाई की जाती है और कई परिवार वहां शुभ चिह्न भी बनाते हैं। इन परंपराओं का उद्देश्य घर में सकारात्मकता और मंगल का स्वागत करना होता है।
मान्यता है कि दाहिना पैर आगे रखकर घर में प्रवेश करना माता लक्ष्मी के स्वागत और उनके आशीर्वाद की कामना का प्रतीक है। इसी कारण गृह प्रवेश की रस्म में इस परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
अगर गलती से पहले रख दिया बायां पैर, तो क्या करें?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, नए घर में प्रवेश करते समय पहले दाहिना पैर रखना चाहिए। लेकिन अगर अनजाने में बायां पैर पहले अंदर चला जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आस्था से जुड़ी ऐसी परंपराओं का उद्देश्य शुभ शुरुआत और मन में सकारात्मक भाव बनाए रखना है।
इसलिए भूल हो जाने पर इसे अशुभ संकेत मानकर परेशान होने के बजाय सहज रहें। गृह प्रवेश के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें और पूजा-पाठ अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न करें।