‘ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रपति को भेज दिया इस्तीफा’, वायरल लेटर ने मचाई हलचल; चुनाव आयोग ने बताया क्या है सच
नई दिल्ली: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम से एक कथित इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पत्र में दावा किया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए वायरल पत्र को फर्जी बताया है। आयोग के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और फैसलों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वायरल पत्र में क्या लिखा है?
वायरल पत्र में ज्ञानेश कुमार के नाम से दावा किया गया है कि उन्होंने आत्मचिंतन और विचार के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया है। पत्र में भारत सरकार और देश के नागरिकों का भरोसा जताने के लिए धन्यवाद देने तथा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेवा करने का अवसर मिलने को सम्मान की बात बताया गया है।
पत्र पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के हस्ताक्षर भी दिखाए गए हैं और इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित किया गया है।
चुनाव आयोग ने बताया- फर्जी है पत्र
चुनाव आयोग ने वायरल हो रहे कथित इस्तीफा पत्र को फर्जी करार दिया है। आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि ज्ञानेश कुमार की ओर से ऐसा कोई इस्तीफा नहीं दिया गया है। प्रवक्ता के मुताबिक वायरल पत्र एआई से तैयार किया गया और पूरी तरह मनगढ़ंत है।
आयोग ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के फर्जी पत्रों पर विश्वास न करें और इन्हें सही मानकर आगे प्रसारित न करें।
SIR को लेकर मतभेद की खबरों के बाद चर्चा में आए ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार को लेकर यह मामला उस समय सामने आया है, जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की एक मीडिया रिपोर्ट चर्चा में आई थी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के बीच SIR से जुड़े कुछ मुद्दों पर मतभेद थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों की खबरों से इनकार किया था। आयोग ने कहा था कि मतदाता सूची की जांच से जुड़े फैसले सभी की सहमति के बाद लिए गए थे। आयोग के मुताबिक वैचारिक मतभेदों को टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
SIR पर आयोग ने क्या कहा था?
चुनाव आयोग के मुताबिक, उसने 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश जारी किया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में पश्चिम बंगाल समेत 30 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया गया। आयोग ने कहा था कि यह आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था।
विपक्ष ने उठाए थे इस्तीफे की मांग
मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे। विपक्षी दलों की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई थी। इसके अलावा मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने, SIR रोकने और पुराने चुनाव दोबारा कराने जैसी मांगें भी उठाई गई थीं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने भी रखीं मांगें
विपक्ष के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत तीन मांगें रखी थीं। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मांगें पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर से मुंबई में आंदोलन शुरू किया जाएगा। हालांकि, मुंबई पुलिस की ओर से अब तक आंदोलन की अनुमति नहीं दी गई थी।
पार्टी की मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया रोकना और इसकी जांच कराना शामिल है। पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैलेट पेपर से चुनाव कराने का भी समर्थन किया था।