नेपाल में फिर बड़ी तबाही का खतरा, अगले 72 घंटे बेहद अहम; 290 भारतीय तीर्थयात्रियों समेत सैकड़ों लोग अब भी लापता

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नेपाल: तिब्बत-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बुधवार को शुरू हुई इस आपदा की चपेट में रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी और चितवन समेत कई निचले इलाके आए हैं। राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इनमें भारत के 290 नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें अधिकांश कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं।

आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1500 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। कई शव पानी के तेज बहाव में बहकर मैदानी इलाकों तक पहुंच गए हैं। अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने के बाद कुछ शवों को अस्थायी तंबुओं में रखा गया है। अब तक 756 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 54 भारतीय नागरिकों को भी बचाया गया है।

राहत अभियान में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात
बचाव अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। चीन की ओर से भी 141 बचावकर्मी तैनात किए गए हैं और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की पश्चिमी थिएटर कमान का दल भी मौके पर भेजा गया है। नेपाल और चीन के शीर्ष अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का जायजा ले रहे हैं। राहत एवं बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती टूटे हुए रास्ते और पुल हैं, जिनके कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

20 से ज्यादा पुल और 40 किलोमीटर राजमार्ग बहा
बाढ़ के तेज बहाव में 20 से ज्यादा पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए हैं। इसके चलते कई इलाकों का देश के दूसरे हिस्सों से संपर्क टूट गया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकाप्टरों की मदद ली जा रही है। कई गांवों में सड़क और पुल टूटने के कारण राहत पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

290 भारतीय नागरिकों की तलाश जारी
भारत के 290 नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है। इसके अलावा अमेरिका के 65, यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51, ऑस्ट्रेलिया के 35 और ब्रिटेन के 33 नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है। नेपाल के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। चितवन में 132, नवलपरासी ईस्ट में 82, धादिंग में 33, गोरखा में 30, नुवाकोट में 28, तनहुं में 22, रसुवा में 17 और नवलपरासी वेस्ट में 15 शव मिलने की जानकारी दी गई है।

50 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से आया मलबा
चीन के हिस्से वाले प्रभावित क्षेत्र में भी बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। चीनी भूवैज्ञानिक गुओ झाओचेंग के मुताबिक बाढ़ और मलबे का बहाव करीब 50 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से हुआ होगा। इतनी तेज गति के कारण लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिला। मलबा 20 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैल गया और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों तथा बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा।

अब नई झील टूटने का खतरा, 72 घंटे पर नजर
पहली आपदा के बाद चीन-नेपाल सीमा पर एक और बड़े खतरे की आशंका जताई गई है। चीन के अधिकारियों के मुताबिक ग्यिरोंग से करीब 18 किलोमीटर ऊपर छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास मलबे के कारण एक बैरियर झील बन गई है। इसमें गुरुवार सुबह तक करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और पानी बाहर निकलना शुरू हो गया था। अगले तीन दिनों में झील में करीब 30 लाख घन मीटर और पानी पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।

चीन ने आपात तैयारी तेज की
चीनी जल संसाधन मंत्रालय झील की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। संभावित रूप से झील टूटने पर बाढ़ के असर का अनुमान लगाने के लिए जोखिम आकलन और अनुकरण किया जा रहा है। आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दल, सेना के जवान, इंजीनियरिंग टीमें, दूरसंचार कर्मी और राहत संगठनों को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है। लगातार बारिश, खराब रास्तों और दूसरी प्राकृतिक आपदा की आशंका ने बचाव अभियान को और कठिन बना दिया है।

नेपाल में भी हाई अलर्ट
नेपाल ने भी संभावित खतरे को देखते हुए भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। नई झील के टूटने की आशंका के बीच लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने सर्वदलीय बैठक भी बुलाई। बैठक में सीमा पार ग्लेशियर से जुड़े खतरों से निपटने के लिए चीन के साथ राजनयिक बातचीत और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की गई

 

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