नेपाल में महाविनाश के बीच 290 भारतीय लापता, ज्यादातर कैलास मानसरोवर के तीर्थयात्री; सेना और बचाव दलों ने तेज की तलाश

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नई दिल्ली: नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। अब तक 290 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें त्रिशूली-1 बिजली परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है। भारत सरकार ने नेपाली पक्ष के साथ समन्वय बढ़ाते हुए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की निगरानी में भारतीय अधिकारियों की टीमें लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। विदेश मंत्रालय प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और स्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, यात्रा संचालकों और परियोजना अधिकारियों के संपर्क में है। नेपाल के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

विदेश मंत्री ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा
एस. जयशंकर ने विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम तथा काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों के साथ स्थिति की समीक्षा की है। उनका जोर प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों का जल्द पता लगाने और राहत अभियान को बेहतर तरीके से समन्वित करने पर है। हालांकि, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था ठप होने से जमीन पर मौजूद लोगों से संपर्क करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

रसुवा और नुवाकोट में मलबा हटाना सबसे बड़ी चुनौती
भारतीय विदेश मंत्रालय को प्रभावित क्षेत्रों से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक रसुवा, नुवाकोट और बिदुर में सबसे पहले बड़े पैमाने पर मलबा हटाने की जरूरत है। त्रिशुली बाजार और बिदुर के आसपास नदी किनारे बसे गांव, बाजार और दुकानें कीचड़ तथा मलबे में दब गए हैं। राहत सामग्री प्रभावित लोगों तक पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपकरण और मानवबल की कमी के कारण बड़े स्तर पर राहत अभियान शुरू करने में समय लग सकता है।

288 भारतीयों से संपर्क नहीं, 73 बिजली परियोजना के कर्मचारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार उपलब्ध जानकारी में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 बिजली परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास परियोजना के प्रमुख के संपर्क में है, ताकि वहां काम कर रहे भारतीयों के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके।

कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए कई समूह लापता
लापता भारतीयों में कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए कई समूह शामिल हैं। तमिलनाडु के 37 और 49 नागरिकों के दो अलग-अलग समूह सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के जरिए यात्रा पर गए थे। रसुवा जिले के तिमुरे में सम्राट ट्रैवल्स के साथ गए बंगाल के 32 भारतीय भी लापता बताए गए हैं। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीय रिचा टूर्स के जरिए यात्रा पर गए थे, जिनमें केरल के 33 नागरिकों का एक समूह भी शामिल है।

इन पांच प्रमुख समूहों में करीब 288 भारतीय नागरिक शामिल हैं। हालांकि राहत अभियान के दौरान तमिलनाडु के 21 नागरिकों के एक दल को सुरक्षित बचा लिया गया है। भारतीय दूतावास और राजदूत ने इन लोगों से बातचीत कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है। ये लोग काठमांडू पहुंच रहे हैं और इसके बाद उनके घर लौटने की व्यवस्था की जाएगी।

भारत ने नेपाल भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
भारत ने आपदा के बाद नेपाल को तत्काल राहत सहायता भेजी है। बाढ़ आने के 24 घंटे के भीतर भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। इसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सौर ऊर्जा से चलने वाले दीपक और जरूरी दवाएं शामिल थीं।

गुरुवार को दूसरी उड़ान के जरिए 37.5 टन मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्य पैकेट नेपाल भेजे गए। इस तरह भारत की ओर से अब तक करीब 47.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। जरूरत के मुताबिक आगे भी सहायता भेजने की तैयारी जारी है

 

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