महिलाओं में ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक का खतरा! AIIMS डॉक्टर ने बताए 3 बड़े संकेत, ये टेस्ट समय पर बचा सकते हैं जान

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नई दिल्ली: महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण कई बार पुरुषों से अलग और कम स्पष्ट हो सकते हैं। AIIMS दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और एचओडी डॉ. राजीव नारंग के मुताबिक, महिलाओं को सीने में दर्द या बेचैनी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खास तौर पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अधिक वजन जैसी स्थितियां मौजूद हों तो सावधानी और भी जरूरी हो जाती है।

डॉ. नारंग ने बताया कि महिलाओं में दिल की बीमारी का जोखिम आमतौर पर जीवन में बाद के चरण में बढ़ता है। मेनोपॉज से पहले यह जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है, जबकि मेनोपॉज के बाद इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अब युवा महिलाओं में भी हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण क्यों हो सकते हैं अलग

महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान हमेशा तेज सीने का दर्द ही महसूस हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार हल्का भारीपन, बेचैनी, थकान या असामान्य दर्द जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे संकेतों को सामान्य समझकर टालना जोखिम भरा हो सकता है।

मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण महिलाओं में हार्ट डिजीज का जोखिम कम माना जाता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा कम होने के साथ जोखिम बढ़ सकता है। वहीं डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे जैसी स्थितियां भी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाती हैं।

सीने में भारीपन या दर्द हो तो तुरंत जांच जरूरी

डॉ. राजीव नारंग के अनुसार, हार्ट अटैक से पहले होने वाले सीने के दर्द को प्री-इन्फार्क्शन एंजाइना कहा जाता है। अगर किसी महिला को सीने में भारीपन या दर्द महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेने या तुरंत नजदीकी आपातकालीन विभाग पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए।

अस्पताल में डॉक्टर दिल की मांसपेशियों को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए ईसीजी और रक्त जांच करते हैं। जांच के परिणामों के आधार पर जरूरत पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू किया जा सकता है।

ट्रोपोनिन और ईसीजी से दिल को हुए नुकसान का पता

आपात स्थिति में ईसीजी और ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण जांच मानी जाती हैं। ट्रोपोनिन एक ऐसा प्रोटीन है जो दिल की मांसपेशियों की कोशिकाओं में पाया जाता है। जब हार्ट अटैक जैसी स्थिति में दिल तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित होने से कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, तो ट्रोपोनिन खून में पहुंच जाता है।

ब्लड टेस्ट में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ा हुआ मिलने पर दिल की मांसपेशियों को नुकसान होने का संकेत मिल सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कर तत्काल इलाज की जरूरत पड़ सकती है। ईसीजी के जरिए भी दिल की गतिविधियों में होने वाले बदलावों की जांच की जाती है।

चेस्ट एक्स-रे से दिल और फेफड़ों की स्थिति की जांच

चेस्ट एक्स-रे भी जांच का एक हिस्सा हो सकता है। इसके जरिए डॉक्टर यह देख सकते हैं कि दिल का आकार सामान्य है या बढ़ा हुआ है। दिल के बढ़े हुए आकार को कार्डियोमेगाली कहा जाता है। इसके अलावा एक्स-रे से फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है।

इकोकार्डियोग्राफी से पंपिंग और वाल्व की जांच

इकोकार्डियोग्राफी यानी ईसीएचओ दिल का अल्ट्रासाउंड होता है। इस जांच से दिल के चारों कक्षों की बनावट देखी जा सकती है। साथ ही यह भी पता चलता है कि दिल कितनी प्रभावी तरीके से रक्त पंप कर रहा है। इसे इजेक्शन फ्रैक्शन यानी ईएफ के जरिए आंका जाता है।

ईसीएचओ के जरिए दिल के चारों वाल्व की स्थिति भी देखी जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि वाल्व में रिसाव है या उनके काम करने में किसी तरह की रुकावट है।

 

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