यूपी पुलिस के बेड़े में 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल, अब तेज रफ्तार से लेकर नशे में ड्राइविंग तक पर होगी सख्त नजर
लखनऊ: सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की कुल संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन शामिल हैं।
नए वाहनों की मदद से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जाएगा। इन वाहनों में स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण लगाए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के तौर पर भी किया जा सकेगा।
700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना अब प्रदेश के सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इस अभियान के तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
ये विशेष टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग के साथ निगरानी कर रही हैं। साथ ही यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है।
आठ महीने में सड़क हादसों और मौतों में कमी
प्रदेश में पिछले आठ महीनों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी अवधि में सड़क हादसों में मृतकों की संख्या में भी करीब आठ प्रतिशत की गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।
109 मार्गों पर रियल टाइम ट्रैफिक निगरानी
शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए आरटीसी योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की यूपी गति प्लेटफॉर्म के जरिए रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम की वजहों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं।
मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे। अगस्त तक इनकी संख्या घटकर 8,569 रह गई। इस तरह इन मार्गों पर कंजेशन पॉइंट में करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
कैमरों से निगरानी, उल्लंघन पर ई-चालान
यातायात व्यवस्था पर नजर रखने के लिए आईटीएमएस और सेफ सिटी कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। एएनपीआर के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड के जरिए यातायात की निगरानी की जाती है।
जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के ई-चालान किए जा रहे हैं। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।