‘रूस एक बड़ी मशीन है, उसे रोकना मुश्किल’, ट्रंप ने यूक्रेन पर डाला युद्ध खत्म करने का दबाव; पुतिन-जेलेंस्की की दुश्मनी बनी बड़ी बाधा

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नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अब यूक्रेन पर ही जंग खत्म करने की जिम्मेदारी डाल दी है। ट्रंप का कहना है कि युद्ध में रूस ज्यादा ताकतवर दिखाई दे रहा है और लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रूस को एक बड़ी मशीन बताते हुए कहा कि मॉस्को यूक्रेन के कई इलाकों पर कब्जा कर चुका है। वहीं, दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच गहरी दुश्मनी को बातचीत में बड़ी बाधा माना जा रहा है।

ट्रंप ने रूस की ताकत का हवाला देकर यूक्रेन को क्या कहा?

ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन युद्ध में रूस के मुकाबले पिछड़ रहा है। उनके मुताबिक, रूस नए इलाकों पर कब्जा कर रहा है, जबकि यूक्रेन अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में यूक्रेन को खुद युद्ध समाप्त करने की इच्छा दिखानी होगी।

ट्रंप ने रूस की सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए उसे एक बड़ी मशीन बताया, जो लगातार आगे बढ़ती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि रूस यूक्रेन के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर चुका है। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी आर्थिक सहायता पर भी सवाल उठाए और पूछा कि इससे वाशिंगटन को आखिर क्या हासिल हुआ।

स्टीव विटकोफ और जेलेंस्की की मुलाकात से शांति की उम्मीद

रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं। मंगलवार को अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में मुलाकात हुई। इस बातचीत में अमेरिका की कोशिश रूस के ताजा हमलों को रोकने और संघर्ष समाप्त करने की दिशा में रास्ता तलाशने की रही।

हालांकि, युद्ध समाप्त करने को लेकर अभी तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका अब यूक्रेन पर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बना रहा है।

पुतिन और जेलेंस्की की दुश्मनी को बताया बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट

ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता नहीं हो पाने की एक प्रमुख वजह दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच गहरी व्यक्तिगत दुश्मनी को बताया। उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की एक-दूसरे को पसंद नहीं करते और उनके बीच नफरत की भावना बातचीत में बाधा बन रही है।

अमेरिका लंबे समय से यूक्रेन को आर्थिक सहायता देने के साथ सैन्य उपकरण भी उपलब्ध कराता रहा है। ट्रंप ने इस सहायता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका को इसके बदले दुख, मौत और भारी आर्थिक नुकसान के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। उनका रुख इस बात का संकेत है कि वह युद्ध में अमेरिकी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी असंतोष जता रहे हैं।

रूस के प्रति नरम रुख के पीछे क्या है वजह?

रूस को लेकर अमेरिकी नीति में नरमी की चर्चा के बीच ऊर्जा की कीमतों और घरेलू आर्थिक दबाव को भी अहम माना जा रहा है। खबर के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में ट्रंप ने रूस से डीजल खरीद को मंजूरी दी है। इससे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ अन्य देशों को भी राहत मिली है।

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे। अब अमेरिका में घरेलू महंगाई कम करने और ऊर्जा की उपलब्धता से जुड़े दबावों के बीच मॉस्को के साथ कुछ मामलों में नरमी दिखाई दे रही है। इसके साथ ही अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम हैं। खबर के अनुसार, इन चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

एक साल में युद्ध खत्म करने का दावा भी नहीं हुआ पूरा

ट्रंप कई महीनों से रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में जुटे रहे हैं। उन्होंने पहले इस संघर्ष को एक साल के भीतर खत्म करने का दावा भी किया था, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। अब उनके ताजा बयान में युद्ध समाप्त करने की जिम्मेदारी यूक्रेन पर डालने और रूस की सैन्य ताकत का हवाला देने से अमेरिकी रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

फिलहाल रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष समाप्त कराने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन पुतिन और जेलेंस्की के बीच अविश्वास, क्षेत्रीय कब्जे और युद्ध की शर्तों पर मतभेद शांति समझौते की राह में बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।

 

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