सीएम योगी से नियुक्ति पत्र दिलाने का झांसा, 43 लोगों से 80 लाख की ठगी; ऐसे बिछाया जाल

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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 43 लोगों से 80 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि ठगों ने खुद को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के संयुक्त सचिव का रिश्तेदार बताकर लोगों को भरोसे में लिया। उन्हें लोअर डिवीजन क्लर्क और चपरासी की नौकरी दिलाने का वादा किया गया। इतना ही नहीं, पीड़ितों से कहा गया कि नौकरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें नियुक्ति पत्र देंगे। मामले में एक पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

बिरहाना रोड निवासी शरद अवस्थी एक सिनेमा हॉल में केयरटेकर हैं। उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत देकर बताया कि फजलगंज निवासी नीरज मिश्रा बिजली का काम करने आता था। वर्ष 2024 में बातचीत के दौरान नीरज ने दावा किया कि उसके ममिया ससुर अरविंद नारायण माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज में संयुक्त सचिव हैं और उन्होंने कानपुर देहात के एक स्कूल में चतुर्थ श्रेणी के पद पर उसकी नौकरी लगवाई है।

पांच लाख रुपये में नौकरी दिलाने का दावा

शरद अवस्थी के मुताबिक, नीरज ने उनके बेटे और बेटी को शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव दिया। उसने दावा किया कि राज्यपाल के कोटे से पांच लाख रुपये में नौकरी लगवाई जा सकती है। रकम का आधा हिस्सा पहले और बाकी बाद में देने की बात कही गई। भरोसा करके शरद ने ढाई लाख रुपये दे दिए।

इसके बाद नीरज उनके बेटे और बेटी को लखनऊ ले गया और नौकरी के लिए आवेदन फॉर्म भरवाए। आरोप है कि इसके बाद वह नियुक्ति पत्र देने के नाम पर लगातार नई तारीखें देता रहा। जब पीड़ित ने मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि कथित तौर पर 43 लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर 80 लाख रुपये से ज्यादा वसूले गए हैं।

प्रयागराज से लखनऊ तक ले गए, पूरी कराई कागजी कार्रवाई

शिकायत के अनुसार, आरोपित ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यालय तक पहुंचाया। वहां कैंटीन में अरविंद नारायण शुक्ला नाम के व्यक्ति से मुलाकात कराई और उन्हें अपना रिश्तेदार बताते हुए आयोग से जुड़ा अधिकारी बताया।

इसके बाद पीड़ितों को लखनऊ स्थित शिक्षा निदेशालय के कार्यालय ले जाया गया, जहां ज्ञानेंद्र दुबे नाम के व्यक्ति से मिलवाया गया। आरोप है कि अभ्यर्थियों से सात चरणों में कागजी प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसमें हलफनामा, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षिक प्रमाणपत्र और पुलिस सत्यापन जैसे दस्तावेज शामिल थे।

इस दौरान शरद के परिचित शान अली भी अपने भतीजे मोहम्मद सोहेल के साथ मौजूद थे। आरोपितों ने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट, जांच जारी

मामले में कोतवाली थाना प्रभारी अरुण द्विवेदी ने बताया कि शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। जांच में ठगी की रकम, पीड़ितों की संख्या और आरोपितों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

 

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