सोना महंगा, टैक्स भारी फिर भी 10 ग्राम पर ₹5,000 तक की छूट! जानें बिना बिल खरीद में कैसे बच रहा पैसा

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नई दिल्ली: भारत में सोने की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बनी हुई है और इसके साथ टैक्स का बोझ भी काफी है। इसके बावजूद बाजार में कुछ खरीदारों को बिना बिल और नकद भुगतान पर सोने की खरीद में बड़ी छूट मिलने की बात सामने आई है। बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, बिना बिल नकद खरीद पर थोक खरीदारों को मौजूदा बाजार भाव से करीब 6 फीसदी तक की छूट मिल सकती है। इस छूट का एक हिस्सा व्यापारियों की ओर से टैक्स बचत से जुड़ा बताया जा रहा है।

बाजार में सामने आए एक मामले के मुताबिक, एक गृहिणी ने बेटी की शादी के लिए गहने खरीदते समय हर 10 ग्राम पर करीब 5,000 रुपये की छूट ली। हालांकि, इस खरीद के बदले उन्हें कोई रसीद नहीं मिली। सोने की ऊंची कीमतों के बीच उनके लिए यह बचत आकर्षक थी।

10 ग्राम पर ₹5,000 की छूट, लेकिन बिल नहीं

बाजार में बिना बिल नकद खरीद का चलन सोने की ऊंची कीमतों के बीच कुछ ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। एक खरीदार ने बताया कि ज्वेलर पर भरोसा होने के कारण उन्होंने बिना रसीद के खरीदारी की और हर 10 ग्राम पर करीब 5,000 रुपये की बचत हुई।

सोने की कीमतों में हाल में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद भाव एक साल पहले की तुलना में करीब 28 फीसदी अधिक बताए जा रहे हैं। ऐसे में कुछ ग्राहक छूट के बदले बिल नहीं लेने का विकल्प चुन रहे हैं।

सोने पर 15 फीसदी आयात शुल्क और 3 फीसदी GST

भारत में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 15 फीसदी है। इसके अलावा खुदरा खरीदारों को सोने की खरीद पर 3 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी भी देना पड़ता है।

सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला सोने की मांग और आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया था। सोने के बढ़ते आयात का असर देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा पर पड़ता है।

हालांकि, बाजार में इस नीति का एक दूसरा असर भी सामने आया है। ऊंचे टैक्स के कारण कुछ कारोबारी और खरीदार अनौपचारिक बाजार की ओर रुख कर रहे हैं, जहां लेनदेन बिना बिल और सरकारी रिकॉर्ड के होने की बात कही जा रही है।

समानांतर बाजार में 200 डॉलर प्रति औंस तक का अंतर

बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक, नकद कारोबार करने वाले व्यापारी घरेलू कीमतों की तुलना में करीब 200 डॉलर प्रति औंस तक सस्ता सोना हासिल कर पा रहे हैं। अनौपचारिक बाजार में सौदे किसी एक तय मानक के बजाय अलग-अलग स्तर पर तय होने की बात कही गई है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आयात शुल्क बढ़ने से सरकारी कर वाले औपचारिक चैनल के बाहर सोना हासिल करने की प्रेरणा बढ़ सकती है। इसी वजह से आधिकारिक और अनौपचारिक बाजार के भाव में अंतर दिखाई दे रहा है।

आधिकारिक आयात में भी मिल रही छूट

एक बाजार परामर्श संस्था के मुताबिक, सितंबर में सरकारी चैनल के जरिए आयात किए गए सोने की लैंडेड कीमत पर औसत छूट करीब 50 डॉलर प्रति औंस रही। वहीं कुछ खुदरा ग्राहकों को ज्वेलर से मोलभाव और पुराने कारोबारी संबंधों के आधार पर 10 ग्राम पर 10,000 रुपये तक की छूट मिलने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, ऐसी छूट की उपलब्धता ग्राहक, कारोबारी, खरीद की मात्रा और भुगतान के तरीके के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

भारत में सोने की मांग इतनी ज्यादा क्यों है

चीन के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। यहां सोने का इस्तेमाल केवल निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि शादी, त्योहार, उपहार और पारिवारिक बचत के रूप में भी किया जाता है।

देश में सोने का घरेलू उत्पादन मांग की तुलना में बहुत कम है। इसलिए जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। सोने का भारी आयात देश के व्यापार बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव डालता है।

सोने के आयात से बढ़ता व्यापार घाटा

सोना कच्चे तेल के बाद भारत की प्रमुख आयातित वस्तुओं में शामिल है और व्यापार घाटे में इसका बड़ा योगदान रहता है। जुलाई में देश का व्यापार घाटा करीब 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो उस साल का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया।

जुलाई तक लगातार चार महीनों में सोने की खेप का आयात बिल पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 32 फीसदी से ज्यादा बढ़ा था। हालांकि, अगस्त में सोने का आयात पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम रह गया।

शादी और त्योहारों के सीजन में बढ़ता कारोबार

भारत में अनौपचारिक सोने का कारोबार नया नहीं है, लेकिन जब आयात शुल्क कम था तब आधिकारिक चैनल से बाहर खरीदारी करने की वजह अपेक्षाकृत कम थी। आयात शुल्क बढ़ने के बाद औपचारिक और अनौपचारिक बाजार के बीच कीमत का अंतर बढ़ने की बात सामने आई है।

शादी और त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में कीमतों में छोटा प्रतिशत अंतर भी खरीदार के लिए हजारों रुपये का फर्क पैदा कर सकता है। यही वजह है कि ऊंची कीमतों के दौर में बिना बिल मिलने वाली छूट कुछ ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।

 

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