क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत-अमेरिका की बड़ी पहल, जी20 बैठक में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति; सुरक्षित होगी आपूर्ति श्रृंखला
एशविले: भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। यह सहमति वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बीच हुई बातचीत के बाद बनी। दोनों नेताओं की मुलाकात नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान हुई। बातचीत में महत्वपूर्ण खनिजों के साथ उनकी सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला को भारत-अमेरिका आर्थिक संवाद के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया।
दोनों देशों ने अपने लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित करने के साथ शोध और तकनीक साझा करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई।
निर्मला सीतारमण ने बेसेंट को दिया नई दिल्ली आने का न्योता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को इस साल के अंत में नई दिल्ली आने का न्योता दिया है। प्रस्तावित दौरे के दौरान भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी बैठक आयोजित की जाएगी। इसके जरिए दोनों सरकारों को आर्थिक और वित्तीय सहयोग की समीक्षा करने तथा साझेदारी के विस्तार वाले नए क्षेत्रों की पहचान करने का अवसर मिलेगा।
भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, स्कॉट बेसेंट ने जी7 प्लस ढांचे में भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर जी7 के नेतृत्व में चल रहे संवाद में भारत की भागीदारी का भी स्वागत किया।
महत्वपूर्ण खनिजों पर क्यों बढ़ा दोनों देशों का फोकस?
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुई चर्चा का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और शोध तथा तकनीक साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। महत्वपूर्ण खनिज अब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
एशविले में हुई बैठक ने भारत और अमेरिका को महत्वपूर्ण खनिजों के मुद्दे को व्यापक आर्थिक और वित्तीय साझेदारी से जोड़ने का अवसर दिया। सीतारमण और बेसेंट की बातचीत ने यह भी दिखाया कि दोनों सरकारें आर्थिक मामलों पर नियमित उच्चस्तरीय संपर्क को कितना महत्व देती हैं।
भारत के लिए यह सहयोग क्यों है अहम?
महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े संवाद में भारत की भागीदारी उसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा, शोध और तकनीक के क्षेत्र में मिलकर काम करने का अवसर देती है। वहीं, अमेरिका के लिए भारत की भागीदारी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधनों से जुड़े प्रयासों में एक बड़ी अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण उभरते बाजार को जोड़ती है।
बेसेंट को नई दिल्ली आने का न्योता यह भी संकेत देता है कि भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक तथा वित्तीय साझेदारी आगे भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनी रहेगी। इसके जरिए मंत्रिस्तरीय स्तर पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा जारी रखी जा सकती है।
नई दिल्ली में बैठक कब होगी?
इस साल के अंत में नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक एशविले में हुई बातचीत को आगे बढ़ाएगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने अभी बैठक की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दोनों देश किन विशिष्ट पहलों को आगे बढ़ा सकते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा से रक्षा तक, क्यों जरूरी हैं महत्वपूर्ण खनिज?
महत्वपूर्ण खनिजों का इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रक्षा विनिर्माण और उन्नत तकनीक सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में होता है। इन संसाधनों की बढ़ती रणनीतिक अहमियत के बीच सरकारें आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और किसी एक केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता से पैदा होने वाले जोखिम को कम करने पर जोर दे रही हैं।
ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर बढ़ता सहयोग दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।