गुजरात में बड़ा सियासी मोड़! शंकरसिंह वाघेला की कांग्रेस में वापसी की तैयारी, राहुल गांधी से मुलाकात के बाद होगा फैसला

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गांधीनगर: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शंकरसिंह वाघेला करीब एक दशक बाद कांग्रेस में वापसी की तैयारी में हैं। वाघेला ने कहा है कि गुजरात में बीजेपी सरकार को हटाने के लिए वह कांग्रेस में शामिल होने को तैयार हैं। हालांकि, उनकी कांग्रेस में वापसी पर अंतिम फैसला राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही होगा।

वाघेला के मुताबिक, कांग्रेस में वापसी को लेकर गुजरात प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी से बातचीत हो चुकी है। उन्होंने साफ किया कि राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

कांग्रेस में वापसी को लेकर बातचीत तेज

शंकरसिंह वाघेला ने 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी। अब करीब 10 साल बाद उनकी दोबारा पार्टी में वापसी को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब गांधीनगर नगर निगम चुनाव नजदीक हैं और दिसंबर 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।

86 वर्षीय वाघेला ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी से किसी पद या व्यक्तिगत लाभ की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि वह पार्टी को अपना योगदान देना चाहते हैं।

वाघेला ने 2027 के विधानसभा चुनाव को अपने राजनीतिक जीवन में प्रभाव डालने का आखिरी मौका बताया है। साथ ही उन्होंने 2 अक्टूबर से अपनी पार्टी प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी को दोबारा सक्रिय करने के लिए आक्रामक अभियान चलाने की बात भी कही है।

कांग्रेस में वाघेला की वापसी पर एक राय नहीं

वाघेला की वापसी को लेकर कांग्रेस के भीतर पूरी तरह एकराय नहीं है। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा है कि पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में कई असंतुष्ट नेता कांग्रेस के साथ मंच साझा कर सकते हैं और गुजरात में बदलाव के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि कांग्रेस समान विचारधारा रखने वाले लोगों का स्वागत कर रही है। हालांकि, पार्टी के एक वर्ग में वाघेला की वापसी को लेकर अभी भी सवाल हैं। इसकी एक वजह 2017 में कांग्रेस छोड़ने के समय की परिस्थितियां बताई जा रही हैं।

2017 में क्यों छोड़ी थी कांग्रेस?

शंकरसिंह वाघेला ने 2017 में अपने 77वें जन्मदिन पर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया था। उस समय राज्यसभा चुनाव होने वाले थे। इसी चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की थी।

इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के कम से कम आठ विधायकों पर कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग के सवाल उठे थे। इसके चार दिन बाद तत्कालीन गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की थी। राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था।

गुजरात में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 182 में से 77 सीटें जीती थीं। यह 1995 में गुजरात में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद राज्य में कांग्रेस का सबसे मजबूत प्रदर्शन था। उस चुनाव के दौरान हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाला पाटीदार आरक्षण आंदोलन भी बड़ा मुद्दा रहा था।

इसके बाद गुजरात में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई। मौजूदा 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। यह संख्या नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के लिए भी पर्याप्त नहीं है।

लोकसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस 2014 और 2019 में गुजरात की एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। 2024 में पार्टी ने बनासकांठा सीट पर जीत दर्ज की थी। फिलहाल इस सीट का प्रतिनिधित्व जेनीबेन ठाकोर कर रही हैं।

पहले भी कांग्रेस में लौटने की इच्छा जता चुके हैं वाघेला

2021 में अहमद पटेल के निधन के एक साल बाद वाघेला ने स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस में लौटने की इच्छा जताई थी। उनके करीबी लोगों के मुताबिक, उस समय उन्हें उम्मीद थी कि कांग्रेस उन्हें मार्गदर्शक और रणनीतिकार की भूमिका में वापस लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अब कांग्रेस में उनकी वापसी की कोशिश करने वाले नेताओं में भरतसिंह सोलंकी भी शामिल हैं। सोलंकी उस समय गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष थे, जब वाघेला ने पार्टी छोड़ी थी। उन्होंने कहा है कि वह करीब डेढ़ साल से वाघेला को कांग्रेस में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोलंकी ने अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान पर छोड़ते हुए कहा कि उनका लक्ष्य गुजरात में उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल करके बीजेपी को चुनौती देना है।

बीजेपी से कांग्रेस और फिर अलग-अलग दलों तक का सफर

शंकरसिंह वाघेला का कांग्रेस से जुड़ाव 1990 के दशक से रहा है। 1996 में बीजेपी से अलग होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता पार्टी बनाई और कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। बाद में राष्ट्रीय जनता पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया।

2002 के विधानसभा चुनाव से पहले वाघेला को गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पहली यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी काम किया।

2017 में कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने जनविकल्प पार्टी बनाई। 2019 में वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ आए और 2020 में उन्होंने प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की।

 

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