चेहरा टेढ़ा होने के अलावा स्ट्रोक के ये 5 लक्षण भी हैं खतरनाक, नजरअंदाज किया तो जा सकती है जान

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नई दिल्ली: स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क तक खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ ही मिनटों के भीतर मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। समय रहते इसके संकेतों को पहचानकर इलाज शुरू किया जाए, तो मरीज की जान बचाने और स्थायी विकलांगता के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। हर साल 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर जानिए इसके पांच ऐसे लक्षण, जिन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

1. चेहरे या शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी

स्ट्रोक का सबसे आम संकेत चेहरे का एक तरफ झुक जाना है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को मुस्कुराने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन महसूस होना भी खतरे का संकेत है। अगर किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे दोनों हाथ उठाने और मुस्कुराने के लिए कहें। यदि चेहरे या हाथों में असमानता नजर आए, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

2. बोलने और दूसरों की बात समझने में परेशानी

अचानक बोलते समय जुबान लड़खड़ाना, सही शब्द याद न आना, अस्पष्ट वाक्य बोलना या सामान्य बातचीत समझने में परेशानी होना भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। व्यक्ति होश में होने के बावजूद अपनी बात ठीक से व्यक्त नहीं कर पाता। ऐसे बदलावों को थकान, तनाव या ध्यान भटकने की समस्या मानकर टालना खतरनाक हो सकता है।

3. आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव

अगर अचानक धुंधला दिखाई देने लगे, एक ही वस्तु दो दिखाई दे या एक अथवा दोनों आंखों की रोशनी चली जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। मस्तिष्क तक खून की आपूर्ति प्रभावित होने पर देखने की क्षमता में अचानक बदलाव आ सकता है। ऐसे लक्षण सामने आने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

4. अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर और शरीर का संतुलन बिगड़ना

बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना, जो तेजी से असहनीय हो जाए, मस्तिष्क में रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। इसके साथ अचानक चक्कर आना, चलते समय लड़खड़ाना, शरीर का संतुलन बिगड़ना या बिना वजह गिर जाना भी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है। ऐसे लक्षणों को सामान्य सिरदर्द या कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

5. अचानक भ्रम की स्थिति या याददाश्त प्रभावित होना

स्ट्रोक के दौरान कुछ लोगों को अचानक भ्रम होने लगता है। वे आसपास की परिस्थितियों को समझने, सामान्य सवालों का जवाब देने या रोजमर्रा के आसान काम करने में परेशानी महसूस कर सकते हैं। अचानक याददाश्त प्रभावित होना या व्यवहार में असामान्य बदलाव आना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

स्ट्रोक पहचानने के लिए याद रखें F.A.S.T. फॉर्मूला

स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानने के लिए F.A.S.T. फॉर्मूला मददगार है। इसके चार हिस्से हैं:

F यानी फेस (चेहरा): देखें कि कहीं चेहरे का एक हिस्सा नीचे तो नहीं झुक रहा।

A यानी आर्म्स (हाथ): जांचें कि क्या व्यक्ति दोनों हाथ समान रूप से उठा पा रहा है या एक हाथ कमजोर पड़ रहा है।

S यानी स्पीच (बोलचाल): ध्यान दें कि बोलने में लड़खड़ाहट, अस्पष्ट आवाज या बात समझने में परेशानी तो नहीं हो रही।

T यानी टाइम (समय): इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन सहायता लें। इलाज में देरी मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को बढ़ा सकती है।

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें?

भारत में स्ट्रोक का संदेह होने पर तुरंत 112 नंबर पर कॉल करके आपातकालीन मदद मांगें। लक्षण शुरू होने का समय नोट कर लें, क्योंकि इलाज के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें और संभव हो तो एम्बुलेंस की मदद लें।

चिकित्सकीय सलाह मिलने तक मरीज को खाने-पीने की चीजें या दवाएं न दें। स्ट्रोक के दौरान निगलने में परेशानी हो सकती है, जिससे खाना या पानी सांस की नली में जाने का खतरा रहता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि यदि स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनट बाद अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी अस्पताल में जांच कराना जरूरी है। यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA), जिसे मिनी-स्ट्रोक भी कहा जाता है, हो सकता है। इसे भविष्य में बड़े स्ट्रोक के खतरे की चेतावनी माना जाता है। इसलिए ऐसे किसी भी संकेत को हल्के में न लें और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

 

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