ज्ञानेश कुमार को CEC बनाने पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल, संधू और विवेक जोशी की नियुक्ति भी चुनौती के घेरे में

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नई दिल्ली: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में दाखिल एक अर्जी में आरोप लगाया गया है कि नियुक्तियों के लिए गठित चयन समिति ने उम्मीदवारों के चुनाव कराने के अनुभव और उनकी ईमानदारी से जुड़े मानकों का ठोस मूल्यांकन नहीं किया। याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त रिकॉर्ड को शीर्ष अदालत में पेश करने की अनुमति भी मांगी है।

चयन प्रक्रिया पर क्या उठाए गए सवाल?

याचिकाकर्ता सूरी पायला ने अपनी अर्जी में कहा है कि चयन समिति ने इस बात का पर्याप्त आकलन नहीं किया कि नियुक्त किए गए अधिकारियों के पास चुनाव कराने और उनके संचालन का जरूरी अनुभव था या नहीं। साथ ही, उम्मीदवारों की ईमानदारी से जुड़े मानकों के मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने रिट याचिका में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि विधायी विभाग से प्राप्त रिकॉर्ड में सर्च कमेटी और चयन समिति के सामने रखे गए दस्तावेजों का विवरण है। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों में मुख्य रूप से उम्मीदवारों की सूची, सेवा संबंधी जानकारी, तारीखें और सर्विस रिकॉर्ड शामिल थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन रिकॉर्ड में चुनाव प्रबंधन के अनुभव और ईमानदारी का कोई ठोस मूल्यांकन दिखाई नहीं देता।

2023 के कानून के तहत नियुक्तियों को चुनौती

याचिकाकर्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत मार्च 2024 और फरवरी 2025 में की गई नियुक्तियों को चुनौती दी है।

अर्जी में इस कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अधिनियम की धारा 5 के तहत सर्च कमेटी को निर्वाचन आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए योग्य पांच लोगों का पैनल तैयार करना होता है। वहीं, धारा 6 चयन समिति की सिफारिशों से संबंधित है।

आरटीआई रिकॉर्ड अदालत में पेश करने की मांग

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आरटीआई के तहत हासिल दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों से नियुक्ति प्रक्रिया में उम्मीदवारों के अनुभव और ईमानदारी के मूल्यांकन से जुड़े पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए सवाल हैं। नियुक्तियों को लेकर अर्जी में किए गए दावों और उनके आधार पर अदालत की ओर से होने वाली कार्रवाई पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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