दांतों की चमक के लिए बेकिंग सोडा और नींबू कितना असरदार? फायदा कम, नुकसान का खतरा ज्यादा

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नई दिल्ली: चमकदार और सफेद दांत हर किसी को पसंद होते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर दांतों का पीलापन दूर करने के लिए कई तरह के घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं। इनमें बेकिंग सोडा, नींबू, हल्दी और सिरके का इस्तेमाल भी शामिल है। कई जगह कुछ ही मिनटों में दांत सफेद करने का दावा किया जाता है, लेकिन हर घरेलू उपाय दांतों के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है।

दांतों का रंग कई कारणों से बदल सकता है। कुछ घरेलू चीजें दांतों की ऊपरी सतह पर मौजूद हल्के दाग कम कर सकती हैं, लेकिन इससे दांतों का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता। इसलिए किसी भी नुस्खे को आजमाने से पहले दांतों के पीलेपन की वजह समझना जरूरी है।

दांत पीले होने के क्या हैं कारण

दांतों के रंग में बदलाव के पीछे खान-पान, उम्र, तंबाकू का सेवन और कुछ दवाओं या उपचार जैसे कई कारण हो सकते हैं। हर स्थिति में घरेलू नुस्खे एक जैसा असर नहीं दिखाते।

खान-पान की आदतें

चाय, कॉफी, तंबाकू और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में मौजूद रंगद्रव्य दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल पर जमा हो सकते हैं। दांतों की नियमित और सही तरीके से सफाई न होने पर ये दाग धीरे-धीरे गहरे पीले या भूरे रंग के हो सकते हैं।

उम्र बढ़ने पर भी बदलता है रंग

उम्र बढ़ने के साथ दांतों का रंग बदलना सामान्य हो सकता है। दांतों की बाहरी परत इनेमल समय के साथ पतली होती जाती है। इसके नीचे मौजूद डेंटिन प्राकृतिक रूप से हल्के पीले रंग का होता है। इनेमल पतला होने पर डेंटिन अधिक दिखाई देने लगता है और दांत पीले नजर आ सकते हैं।

ऐसे मामलों में केवल सतह के दाग हटाने से दांत पूरी तरह सफेद नहीं हो सकते।

तंबाकू और धूम्रपान भी बड़ी वजह

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और तंबाकू के सेवन से दांतों पर जिद्दी पीले या भूरे दाग पड़ सकते हैं। इनमें मौजूद टार और निकोटीन दांतों की सतह पर गहरा रंग छोड़ सकते हैं। ऐसे दाग सामान्य टूथपेस्ट से आसानी से नहीं हटते और दांतों की सफेदी के लिए दंत चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

दवाओं और चोट से भी बदल सकता है रंग

कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की वजह से भी दांतों का रंग बदल सकता है। इसके अलावा दांत में लगी पुरानी चोट उसकी अंदरूनी तंत्रिका को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी स्थिति में दांत अंदर से काला या पीला दिखाई दे सकता है।

बेकिंग सोडा से दांत सफेद करने की कोशिश न करें

बेकिंग सोडा कई व्हाइटनिंग टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाला घटक है। यह दांतों की सतह पर मौजूद कुछ दागों को धीरे-धीरे हटाने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे दांतों का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता।

कई लोग बेकिंग सोडा को दांतों पर बार-बार और जोर से रगड़ते हैं। ऐसा करने से इनेमल घिसने का खतरा रहता है। इनेमल को नुकसान पहुंचने पर दांतों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है और गर्म या ठंडी चीजें खाने-पीने पर दर्द महसूस हो सकता है।

नींबू और सिरके से इनेमल को हो सकता है नुकसान

दांतों को सफेद करने के लिए नींबू और सिरके का इस्तेमाल भी किया जाता है, लेकिन दोनों ही अम्लीय होते हैं। इन्हें बार-बार दांतों पर लगाने या रगड़ने से इनेमल कमजोर हो सकता है।

एक बार इनेमल को नुकसान पहुंचने के बाद वह दोबारा प्राकृतिक रूप से नहीं बनता। इनेमल कमजोर होने से दांतों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है और नीचे मौजूद पीली डेंटिन परत ज्यादा दिखाई दे सकती है। ऐसे में दांतों को सफेद करने की कोशिश उल्टा असर भी डाल सकती है।

डेंटिस्ट की सलाह से कराएं दांतों की व्हाइटनिंग

दांतों को सफेद करने के लिए वैज्ञानिक तरीके भी मौजूद हैं। कई व्हाइटनिंग उत्पादों में पेरोक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है, जो दांतों के पीलेपन से जुड़े रंगद्रव्य को तोड़ने में मदद करता है।

बाजार में मिलने वाली व्हाइटनिंग स्ट्रिप्स और जैल का इस्तेमाल सही तरीके से करने पर धीरे-धीरे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, दंत चिकित्सक की देखरेख में कराई जाने वाली प्रोफेशनल व्हाइटनिंग आम तौर पर ज्यादा नियंत्रित तरीके से की जाती है। दांतों की स्थिति के अनुसार सही तरीका चुनने के लिए डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

 

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