धान-मक्का समेत खरीफ फसलों पर मंडराया कीट-रोगों का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की बचाव की एडवाइजरी

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गौतमबुद्धनगर: तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए खरीफ फसलों में कीट और रोगों के संभावित प्रकोप को लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दुबे ने जनपद के सभी किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और समय रहते सुझाए गए उपाय अपनाने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय पर नियंत्रण से फसलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

धान की फसल में इन कीट-रोगों का खतरा

वर्तमान मौसम में धान की फसल में झोंका, भूरी झुलसा, गंधी बग और तना छेदक का प्रकोप हो सकता है। गंधी बग के प्रकोप से धान की बालियां सफेद और खोखली रह जाती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। वहीं भूरी झुलसा रोग में पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे बनने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्ती सूख सकती है।

खेत में गंधी बग दिखाई देने पर मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सुबह या शाम पौधों पर भुरकाव किया जा सकता है। इसके अलावा इमिडाक्लोप्रिड 17-8 प्रतिशत एसएल की 0.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर, लगभग 100 से 125 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

तना बेधक की निगरानी के लिए 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने की सलाह है। पौधों पर अंड समूह दिखाई देने पर ट्राईकोग्रामा जापोनिकम या ट्राईकोग्रामा किलोनिस 1 लाख अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग किया जा सकता है। रासायनिक नियंत्रण के लिए बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ईसी की 500 मिलीलीटर मात्रा या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी की 18 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर 3 से 5 सेंटीमीटर स्थिर पानी में बिखेरने की सलाह दी गई है।

पत्ती लपेटक की निगरानी के लिए भी 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने को कहा गया है। इसके रासायनिक नियंत्रण के लिए बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ईसी की 500 मिलीलीटर या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी की 1 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर 700 लीटर पानी में घोलकर प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

धान की दुग्धावस्था में हरे, भूरे और सफेद पीठ वाले फुदके का प्रकोप भी हो सकता है। इनके नियंत्रण के लिए बेंजीपायरीमोक्सान 10 प्रतिशत एससी की 900 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने अथवा एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

जीवाणु झुलसा और जीवाणुधारी रोग से बचाव के लिए स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स 1.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले भुरकाव करने को कहा गया है। इसके अलावा स्ट्रेप्टोमाईसिन सल्फेट 90 प्रतिशत और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी के साथ मिलाकर 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव किया जा सकता है।

मक्का में तना बेधक और फॉल आर्मी वर्म से बचाव

मक्का की फसल में तना बेधक कीट की रोकथाम के लिए 10 प्रतिशत मृत गोभ का स्तर दिखाई देने पर नोवालुरोन 05.25 प्रतिशत और इमामेक्टिन बेंजोएट 0.9 प्रतिशत ईसी की 1.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

फॉल आर्मी वर्म की निगरानी और प्रबंधन के लिए प्रति हेक्टेयर 20 से 25 पक्षी आश्रय तथा 3 से 4 प्रकाश प्रपंच स्थापित करने को कहा गया है। इसके अलावा 35 से 40 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाए जा सकते हैं। रासायनिक नियंत्रण के लिए ब्रोफ्लोनिलाइड 20 प्रतिशत एससी की 125 मिलीलीटर या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 47.85 प्रतिशत एससी की 75 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है।

मूंगफली में बीजशोधन पर जोर

मूंगफली की बुवाई से पहले बीज को थिरम 2 ग्राम और कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करने की सलाह दी गई है। इसके विकल्प के तौर पर ट्राईकोडर्मा 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करके बुवाई की जा सकती है।

भूमि शोधन के लिए ट्राईकोडर्मा और ब्युवेरिया बेसियाना की 2.5 किलोग्राम मात्रा को 60 से 75 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर 8 से 10 दिन तक छाया में रखने के बाद अंतिम जुताई के समय खेत की मिट्टी में मिलाने की सलाह दी गई है। इससे भूमि जनित कीट और रोगों के प्रभावी नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

मूंगफली में टिक्का रोग प्रमुख रोगों में शामिल है। इसकी रोकथाम के लिए बिटरटेनोल 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 1 किलोग्राम मात्रा या हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत ईसी की 1.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में घोलकर जरूरत के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

अरहर, उड़द और मूंग के लिए भी जारी किए सुझाव

अरहर, उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों को मृदा जनित रोगों से बचाने के लिए ट्राईकोडर्मा 2 प्रतिशत डब्ल्यूपी और ब्युवेरिया बेसियाना 1 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर 60 से 75 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाने की सलाह दी गई है। मिश्रण को 8 से 10 दिन छाया में रखने के बाद अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे मृदा जनित रोगों के साथ दीमक, सफेद गिडार, सूत्रकृमि, कटवर्म और जड़ की सुंडी जैसे कीटों से बचाव में मदद मिल सकती है।

अरहर की बुवाई से पहले एक किलोग्राम बीज को 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा से उपचारित करने की सलाह दी गई है। अन्य दलहनी फसलों में भी बुवाई से पहले 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजशोधन करने को कहा गया है, जिससे बीज जनित रोगों का नियंत्रण किया जा सके।

सब्जियों में बैंगन और मिर्च की फसल पर भी नजर

बैंगन की फसल में फल एवं तना बेधक कीट से बचाव के लिए ब्रोफ्लोनिलाइड 20 प्रतिशत एससी की 125 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

मिर्च की फसल में थ्रिप्स और फल बेधक के नियंत्रण के लिए सायंट्रानिलीप्रोल 10.26 प्रतिशत ओडी की 600 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा एमामेक्टिन बेंजोएट 05 प्रतिशत एसजी की 200 मिलीलीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर भी छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

 

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