नाना पाटेकर का उत्तराखंड में घर बनाने का सपना रह गया अधूरा, CM धामी से कही थी दिल की बात; पहाड़ों की वादियों ने जीता था दिल
देहरादून: अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर का उत्तराखंड से रिश्ता केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं था। देवभूमि की खूबसूरत वादियों, यहां के शांत वातावरण और लोगों की सादगी ने उन्हें इतना प्रभावित किया था कि उन्होंने उत्तराखंड में अपना घर बनाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के दौरान भी कही थी। अब उनके निधन के बाद उत्तराखंड में घर बसाने की उनकी इच्छा एक अधूरे सपने के तौर पर याद की जा रही है।
CM धामी से मुलाकात में कही थी उत्तराखंड में घर बनाने की बात
1 अक्टूबर 2022 को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें पहाड़ी टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया था। बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने उत्तराखंड के लोगों के व्यवहार और देवभूमि के वातावरण की जमकर तारीफ की थी। इसी दौरान उन्होंने यहां अपना घर बनाने की इच्छा भी जाहिर की थी।
जोशीमठ और नीती घाटी में बिताए थे करीब नौ दिन
इस मुलाकात से कुछ दिन पहले नाना पाटेकर चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में एक मराठी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। उन्होंने करीब नौ दिन जोशीमठ और नीती घाटी क्षेत्र में बिताए थे। इस दौरान पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय जीवन ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने भविष्य में उत्तराखंड में जमीन खरीदकर रहने की इच्छा जताई थी। स्थानीय लोगों से बातचीत में भी उन्होंने यहां मकान बनाने की बात कही थी।
पहाड़ी जीवन, भोजन और शांत माहौल ने खींचा था नाना का ध्यान
नाना पाटेकर की उत्तराखंड में बसने की इच्छा अचानक पैदा नहीं हुई थी। शूटिंग के दौरान उन्होंने पहाड़ी भोजन, रहन-सहन, मौसम और आसपास के तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी ली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें उत्तराखंड का शांत वातावरण बेहद पसंद आया था। जोशीमठ को लेकर उनकी विशेष रुचि की खबरें भी उस समय सामने आई थीं।
देवभूमि की वादियों में घर का सपना अब सिर्फ याद बनकर रह गया
नाना पाटेकर ने जिस उत्तराखंड को अपना घर बनाने के लिए चुना था, वहां बसने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। पहाड़ों में घर बनाने का उनका सपना अब एक याद बनकर रह गया है। जिस देवभूमि की वादियों ने उन्हें आकर्षित किया था, वही वादियां अब उनके उस अधूरे सपने की गवाह रहेंगी। जिंदगी ने उन्हें उस घर की चौखट तक पहुंचने का मौका नहीं दिया।