नेपाल ने बाढ़ के लिए भारत से मांगा मुआवजा? विदेश मंत्रालय ने दिया दो टूक जवाब, कहा- जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की साझा चुनौती

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नई दिल्ली: नेपाल में पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत से जलवायु क्षति के लिए मुआवजे की मांग को लेकर विदेश मंत्रालय ने भारत का रुख साफ किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने साझा चुनौती है और इससे निपटने के लिए अलग-अलग देशों की जिम्मेदारियां और उनकी क्षमताएं ध्यान में रखी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों को उत्सर्जन कम करने के साथ विकासशील देशों को वित्त और तकनीक के जरिए मदद करने में आगे आना चाहिए।

नेपाल की मांग पर भारत ने बताई अपनी नीति

शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल से नेपाल की ओर से भारत, चीन और अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से जलवायु से जुड़े मुआवजे की जिम्मेदारी को लेकर दिए गए बयान पर सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि नेपाल की ओर से इस मामले में एक स्पष्टीकरण भी जारी किया गया है।

जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि जलवायु परिवर्तन एक साझा चुनौती है और इस पर कार्रवाई साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों तथा संबंधित देशों की अपनी क्षमताओं के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए।

विकसित देशों को उठानी चाहिए बड़ी जिम्मेदारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विकसित देशों को विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और तकनीक के हस्तांतरण की मुख्य जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उनके मुताबिक जिन विकसित देशों की ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन में बड़ी भूमिका रही है, उन्हें उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए विकासशील देशों की मदद करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता और तकनीकी हस्तांतरण के जरिए विकासशील देशों को इस चुनौती का सामना करने में सक्षम बनाने के लिए विकसित देशों को आगे आना चाहिए।

नेपाल में आपदा के तुरंत बाद भारत ने पहुंचाई मदद

भारत ने नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद अपनी ओर से तत्काल मानवीय सहायता भी पहुंचाई थी। रणधीर जायसवाल ने कहा कि आपदा के बाद भारत की ओर से की गई त्वरित मदद दोनों देशों के बीच करीबी रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के बाद भारत ने नेपाल की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता और समर्थन जताया। एक करीबी मित्र और साझेदार के तौर पर भारत ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई और आगे भी नेपाल में पुनर्निर्माण और राहत के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा।

भारत ने जलवायु कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

विदेश मंत्रालय ने इस दौरान जलवायु कार्रवाई को लेकर भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। भारत का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जिम्मेदारियों का निर्धारण ऐतिहासिक उत्सर्जन और देशों की क्षमताओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए। साथ ही विकासशील देशों को जरूरी वित्त और तकनीक उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विकसित देशों को निभानी चाहिए।

 

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