काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत ने राहत अभियान तेज कर दिया है। भारत ने गुरुवार को 37.5 टन मानवीय सहायता, जरूरी दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य राहत सामान लेकर दूसरी उड़ान नेपाल के लिए रवाना की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के लगातार संपर्क में है और खोज एवं बचाव अभियान के दौरान हर संभव सहायता जारी रखेगा।
पहले भेजी गई थी करीब 10 टन राहत सामग्री
भारत इससे पहले बुधवार को करीब 10 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। भारतीय वायुसेना के C-130J हरक्यूलिस विमान से राहत सामग्री, दवाइयां और जनरेटर भेजे गए थे। हिंदन एयरफोर्स स्टेशन के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर आर. ढोभाल के मुताबिक, आपदा की जानकारी मिलते ही विमान को जरूरी सामान के साथ तैयार कर दिया गया था। नागरिक प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की मदद से राहत सामग्री को तेजी से रवाना किया गया। विमान करीब दो घंटे में नेपाल पहुंचा और लगभग 10 टन राहत सामग्री वहां पहुंचाई गई।
C-17 ग्लोबमास्टर से भेजी गई दूसरी खेप
दूसरे राहत मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान का इस्तेमाल किया गया। विमान के कमांडर एल. नायक ने बताया कि विमान में करीब 30 से 40 टन राहत सामग्री, चिकित्सा सामान और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल से जुड़ी सामग्री ले जाई जा रही थी। भारत से नेपाल तक पहुंचने में विमान को लगभग 1 घंटे 15 मिनट का समय लगता है। नेपाल में खराब मौसम या किसी अन्य वजह से विमान के नहीं उतर पाने की स्थिति को देखते हुए भारत में दो एयरबेस को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तैयार रखा गया था।
भारी बारिश के बाद कई इलाकों में तबाही
नेपाल में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कों, पुलों, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि कई लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी है। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान मुहैया कराने में जुटी हैं।
जरूरत पड़ने पर भारत और मदद के लिए तैयार
नेपाल को भेजी जा रही राहत सामग्री भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत मानवीय सहायता का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराता रहेगा। भारतीय वायुसेना ने भी संकेत दिया है कि नेपाल को अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ने पर वह आगे के राहत मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है।