बांग्लादेश में जन्माष्टमी की रौनक फीकी, सरकारी अवकाश रद्द होने से हिंदू समुदाय में नाराजगी; मंदिरों में होंगे आयोजन
ढाका: बांग्लादेश में जन्माष्टमी के मौके पर इस बार पहले जैसी रौनक नजर आने की उम्मीद कम है। सरकार की ओर से जन्माष्टमी के लिए मिलने वाला सरकारी अवकाश रद्द किए जाने के बाद हिंदू समुदाय में नाराजगी बताई जा रही है। ढाकेश्वरी मंदिर, चट्टग्राम और सिलहट समेत कई स्थानों पर जन्माष्टमी के आयोजन किए जाएंगे, लेकिन इस बार यह पर्व आधिकारिक सरकारी छुट्टी के बिना मनाया जाएगा।
कई हिंदू त्योहारों की सरकारी छुट्टियां रद्द
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल 2 जनवरी को बांग्लादेश में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा की सरकारी छुट्टियां रद्द कर दी गई थीं। हिंदू जागृति समिति और उसके नेतृत्व में समुदाय के लोगों ने इस फैसले का विरोध किया है। शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद देश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बीच ढाका, सिलहट, खुलना, कुमिला, जेसोर और मीरपुर में बड़े जुलूसों का आयोजन पहले की तरह नहीं हो रहा है।
मंदिरों में होंगे कार्यक्रम, लेकिन बाजारों में नहीं दिख रहा उत्साह
बांग्लादेश के अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, मंदिरों में जन्माष्टमी के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, लेकिन पर्व से करीब दस दिन पहले बाजारों में दिखाई देने वाली तैयारियों और उत्साह में इस बार कमी है। पहले हिंदू त्योहारों के दौरान मंदिरों में विशेष उत्सव होते थे और बड़े जुलूस निकाले जाते थे। मौजूदा परिस्थितियों में पहले जैसी उमंग नजर नहीं आ रही है।
सरकार ने मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने का किया दावा
सियासी उथल-पुथल के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि मंदिरों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। उनके मुताबिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से मंदिरों के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे।
हिंदू समुदाय में अब भी डर का माहौल
बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच के प्रवक्ता निहार हलदर ने कहा कि समुदाय के भीतर अभी भी डर का माहौल है। उनके मुताबिक कुछ मंदिरों में जन्माष्टमी के अवसर पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर पहले जैसी रंगत दिखाई नहीं देगी।