मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, क्या CEC अकेले ले सकते हैं चुनाव आयोग के फैसले?

0 19

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। याचिका में भारत निर्वाचन आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाते हुए यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल या प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जो संविधान के तहत बहुसदस्यीय चुनाव आयोग को सौंपी गई हैं। समाजसेवी राकेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह रिट याचिका दाखिल की है।

सामूहिक निर्णय व्यवस्था लागू करने की मांग

याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज में सामूहिक निर्णय लेने की संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। साथ ही ‘क्यू वारंट’ यानी अधिकार-पृच्छा रिट जारी करने की मांग की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जिन अधिकारों का इस्तेमाल कथित तौर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के नाम पर किया, उनका संवैधानिक आधार क्या है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति ‘आयोग’ को देता है, न कि किसी एक मुख्य चुनाव आयुक्त को। वहीं, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ की धारा 18 सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का प्रावधान करती है। इसके तहत आम सहमति नहीं बनने की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला लिया जाता है।

याचिका में कहा गया है कि मामला किसी व्यक्ति विशेष या संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के भविष्य से नहीं, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक पहचान से जुड़ा है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी हवाला

याचिकाकर्ता ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के उस समय के लिखित संचार और फाइल नोटिंग का हवाला दिया है। याचिका के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों ने चुनाव आयोग के नाम पर उनकी मंजूरी के बिना लिए गए फैसलों और उठाए गए कदमों को लेकर कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज की थीं।

इन आपत्तियों में चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना कथित तौर पर जारी किए गए संचार और आदेश, बैठकों से पहले एजेंडा और बाद में कार्यवृत्त का उपलब्ध नहीं होना, बिना मंजूरी विदेश यात्रा, फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

मतदाता सूची डेटाबेस और IT विभाग को लेकर भी सवाल

याचिका में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर जताई गई उन चिंताओं का भी उल्लेख है, जो मतदाता सूची डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण और चुनाव आयोग के आईटी विभाग में काम के बंटवारे में बदलाव से संबंधित हैं।

हालांकि, याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने की मांग नहीं की गई है कि विवादित प्रत्येक कदम वास्तव में कानूनी अधिकार के बिना उठाया गया था या नहीं। याचिका के अनुसार, इसका फैसला मुख्य रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकता है। इनमें बैठकों के मिनट्स, फाइल नोटिंग, मंजूरी की शीट और आदेश जैसे दस्तावेज शामिल हैं, जिन्हें याचिका में सार्वजनिक नहीं किए जाने की बात कही गई है।

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पेश करने की मांग

याचिका में विवादित फैसलों से जुड़े मिनट्स, फाइल नोटिंग, मंजूरी की शीट और आदेश जैसे रिकॉर्ड पेश करने और उन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही, अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली शक्तियों का इस्तेमाल सामूहिक निर्णय लेने की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए घोषणात्मक और अनिवार्य निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

ईसीआई ने कहा- फैसले सर्वसम्मति से लिए गए

इस बीच, सामने आई आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग द्वारा लिए गए फैसले, जिनमें स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए थे। ईसीआई के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए मुद्दे सामान्य विचार-विमर्श और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.