यूपीआई पर शुल्क को लेकर मायावती का केंद्र पर हमला, महंगाई-बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर बोलीं- जेब आम जनता की ही कटेगी
नई दिल्ली: यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित नए शुल्क को लेकर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने इस व्यवस्था को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला बताया और कहा कि इसका असर सीधे जनता की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए।
यूपीआई शुल्क को लेकर मायावती ने जताई नाराजगी
मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सरकार ने पहले डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया और अब यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लेने की नई व्यवस्था लाई जा रही है। उन्होंने इसे मुनाफाखोरी वाला रवैया बताया और कहा कि व्यवस्था को चाहे किसी भी नाम से लागू किया जाए, अतिरिक्त खर्च का असर आखिरकार आम लोगों पर ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और इसे लेकर लोगों में बेचैनी और आक्रोश होना स्वाभाविक है।
महंगाई और बेरोजगारी का भी उठाया मुद्दा
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से गरीबी और महंगाई की समस्या से जूझ रही है। उनके मुताबिक, बच्चों की शिक्षा, बेरोजगारी और अव्यवस्था जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार की नीतियों और कार्ययोजनाओं में व्यावसायिक लाभ की तुलना में जनकल्याण पर अधिक जोर होना चाहिए। मायावती ने सवाल उठाया कि अगर सरकार जनता की परेशानियों और आर्थिक तंगी की चिंता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा।
उत्तर प्रदेश के स्मार्ट स्कूल प्रस्ताव का स्वागत
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार के करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के प्रस्ताव का भी जिक्र किया। उन्होंने इस पहल का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सरकार को बुनियादी शिक्षा और स्कूलों की जरूरी सुविधाओं पर ध्यान देने की नसीहत दी।
मायावती ने कहा कि बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में पक्की छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
14,500 स्कूलों पर खर्च को लेकर सवाल
मायावती के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये की राशि में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव होगा।
उन्होंने सरकार से इस पहल के तहत स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की बात कही।
2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर शुल्क की चर्चा
गौरतलब है कि सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट फीस लागू किए जाने की बात कही गई है। इसके तहत शुल्क दुकानदार की ओर से दिया जाना है।
ऐसे में यह चर्चा है कि दुकानदार ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग कर सकते हैं या फिर शुल्क का भार सीधे ग्राहक पर डाल सकते हैं।