यूपी में विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी, AI और डेटा से मजबूत होगा स्वास्थ्य-शिक्षा का ढांचा; सरकार का बड़ा फोकस
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी में है। सरकार का जोर तकनीक और नवाचार के जरिए सरकारी योजनाओं के परिणामों को अधिक प्रभावी बनाने पर है। सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन क्षेत्रों में नई तकनीक के इस्तेमाल और बेहतर रणनीति तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को बताया विकास का आधार
बुधवार को होटल क्लार्क्स अवध में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के जरिए सतत विकास लक्ष्यों को गति देने के विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता इन क्षेत्रों में विकास को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
प्रमुख सचिव, नियोजन आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रमुख आधार हैं। अलग-अलग स्तर पर हो रहे नवाचारों को साझा करके प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। डेटा और प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के परिणामों को और बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य और पोषण में डेटा आधारित व्यवस्था पर जोर
स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के दौरान अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए डेटा और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
बाल विकास एवं पुष्टाहार की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत बताई।
बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी मंथन
कार्यशाला में बच्चों में कम वजन, शारीरिक विकास में कमी और पोषण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा में निवेश को मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सतत विकास की आधारशिला बताया
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सतत विकास लक्ष्यों की आधारशिला बताया। कार्यशाला में स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, बच्चों को विद्यालयों में बनाए रखने और सीखने के बेहतर परिणाम हासिल करने से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया।
शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी जोर
प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरि ओम ने शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर अवसरों के रास्ते खुलेंगे।
इसके साथ ही डिजिटल कौशल विकसित करने और बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप युवाओं को तैयार करने पर भी चर्चा हुई। चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में कौशल, रोजगार और करियर में हो रहे बदलावों पर प्रो. बलवंत सिंह मेहता ने विचार रखे।
सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति पर चर्चा
कार्यशाला में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को गति देने के उपायों पर भी मंथन किया गया। तकनीक, डेटा, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को आपस में जोड़कर सरकारी योजनाओं के प्रभाव को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।