यूपी में सीट बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में बढ़ी खींचतान, 180 सीटों की लिस्ट पर अखिलेश को ऐतराज! आखिर कहां फंस रही है गठबंधन की बात?

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान सामने आ रही है। कांग्रेस की ओर से 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताए जाने की खबरों के बीच सपा ने उससे जिताऊ उम्मीदवारों की सूची मांगी है। हालांकि, कांग्रेस इस तरह उम्मीदवारों के नाम साझा करने को तैयार नहीं बताई जा रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति बनाने की चुनौती बढ़ती दिख रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट रुख नहीं रखा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं की ओर से सीटों को लेकर दिए जा रहे बयानों से सपा नेतृत्व सहज नहीं है।

प्रियंका गांधी के सामने भी उठा सीटों का मुद्दा

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कथित तौर पर कहा है कि पार्टी राज्य में कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में कांग्रेस की यह मांग गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद बढ़ा सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय पार्टी के दौरान सपा सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी से कांग्रेस की उन सीटों की सूची देने को कहा था, जहां पार्टी चुनाव लड़ना चाहती है। बताया गया है कि प्रियंका गांधी ने सूची सौंपने का आश्वासन दिया था।

180 सीटों की सूची को अंतिम फैसला नहीं मान रही कांग्रेस

सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने बातचीत के दौरान सीटों की संख्या से ज्यादा उन सीटों की मजबूती पर ध्यान देने की बात कही थी, जहां गठबंधन के उम्मीदवार जीत सकते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कांग्रेस की ओर से साझा की गई 180 सीटों की सूची को अंतिम निर्णय के बजाय बातचीत की शुरुआत बताया गया।

यह भी कहा गया कि दोनों दलों के बीच चर्चा के बाद सीटों की संख्या में बदलाव संभव है और 80 से 90 सीटों पर भी सहमति बन सकती है। हालांकि, सीट बंटवारे पर दोनों पार्टियों की ओर से किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

कांग्रेस ने सीटों को चार श्रेणियों में बांटा

कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने आंतरिक सर्वे के आधार पर सीटों को ए, बी, सी और डी की चार श्रेणियों में बांटा है। इन श्रेणियों के जरिए यह आकलन किया गया है कि किन सीटों पर पार्टी की स्थिति मजबूत हो सकती है। राजेंद्र पाल गौतम ने भी पार्टी के पास मजबूत उम्मीदवार होने की बात कही है।

दूसरी ओर, सपा कांग्रेस से ऐसे प्रत्याशियों की जानकारी चाहती है, जिनके जीतने की संभावना अधिक हो। सपा नेताओं की चिंता है कि यदि गठबंधन में कमजोर उम्मीदवारों को टिकट दिया गया, तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। दोनों दलों का घोषित राजनीतिक लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देना है, लेकिन सीटों और उम्मीदवारों पर सहमति बनाना फिलहाल अहम मुद्दा बना हुआ है।

2022 के चुनाव का प्रदर्शन भी बना चिंता की वजह

पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ा था। पार्टी ने करीब 40 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सपा को आशंका है कि यदि कांग्रेस कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारती है, तो गठबंधन की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस की ओर से हालांकि यह तर्क दिया जा रहा है कि गठबंधन में शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि उसे अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची दूसरी पार्टी के साथ साझा करनी ही होगी।

सीटों की संख्या या उम्मीदवारों की जीत की संभावना, यही है असली सवाल

सपा और कांग्रेस के बीच मौजूदा खींचतान का केंद्र यही है कि सीटों का बंटवारा कुल संख्या के आधार पर हो या प्रत्येक सीट पर जीत की संभावना को प्राथमिकता दी जाए। कांग्रेस अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक बताई जा रही है, जबकि सपा उम्मीदवारों की मजबूती को अहम मान रही है। दोनों दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत से ही स्पष्ट होगा कि सीट बंटवारे का फार्मूला क्या रहता है।

 

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