सोनम वांगचुक की अपील के बाद भी लद्दाख नहीं पहुंचे अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका, पदयात्रा में नहीं दिखे CJP के बड़े नेता
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लद्दाख में आयोजित पदयात्रा में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बड़े नेता नजर नहीं आए। अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर लद्दाख के समर्थन की बात कही थी, लेकिन वे खुद पदयात्रा में शामिल होने के लिए वहां नहीं पहुंचे। वांगचुक ने पहले लोगों से इस पदयात्रा में शामिल होने की अपील की थी।
लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर पदयात्रा
24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। इस दौरान चार लोगों की मौत हुई थी। इसकी पहली बरसी के मौके पर सोनम वांगचुक ने 23 सितंबर को लेह में प्रतीकात्मक पदयात्रा का नेतृत्व किया। 24 सितंबर को शहीद दिवस मनाने का ऐलान किया गया है।
वांगचुक ने पहले 19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा की घोषणा की थी। खराब मौसम के कारण कार्यक्रम में बदलाव किया गया और इसे एक दिन की प्रतीकात्मक पदयात्रा तक सीमित कर दिया गया। बुधवार को वांगचुक कुछ दर्जन यात्रियों के साथ लेह की ओर रवाना हुए। इसमें लद्दाख के अलावा कुछ अन्य राज्यों से आए लोग भी शामिल थे।
वांगचुक की अपील पर नेताओं ने जताया था समर्थन
वांगचुक ने दिल्ली से बनाए गए एक वीडियो में अपने पहले के अनशन का जिक्र करते हुए लोगों से पदयात्रा में शामिल होने की अपील की थी। इसके बाद अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लद्दाख के समर्थन की बात कही थी।
हालांकि, इन नेताओं की ओर से लद्दाख जाने की कोई घोषणा नहीं की गई थी और न ही उन्होंने वहां जाने से इनकार किया था। पदयात्रा के दौरान वांगचुक ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि उन्होंने एक बार अधिक से अधिक लोगों के आने की अपील की थी, लेकिन बाद में इस पर ज्यादा जोर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग आए, उनका स्वागत किया गया।
लद्दाख हिंसा से जुड़े 20 मामलों की वापसी
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 23 सितंबर को 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के व्यापक हित में लिया गया है। पुलिस की समीक्षा के बाद इन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट की सिफारिश की गई थी।
24 सितंबर 2025 को राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस दौरान चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मामलों में कार्रवाई की गई थी।
शहीद दिवस के मौके पर जारी है लद्दाख का मुद्दा
वांगचुक और लद्दाख के अन्य संगठनों की ओर से क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों और राजनीतिक अधिकारों की मांग जारी है। पहली बरसी के मौके पर लेह में पदयात्रा के साथ चार मृतकों को याद करने और उनकी मांगों को उठाने का कार्यक्रम रखा गया है।